बिना किसी पहचान पत्र के 2000 हजार रुपए के नोट बैंक में बदलने के अधिसूचना को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। यह अधिसूचना भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) एवं भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने 19 व 20 मई को जारी की है। यह चुनौती भाजपा नेता व अधिवक्ता अश्वनी कुमार उपाध्याय ने दी है।
उन्होंने अधिसूचनाओं को मनमाना और भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 के खिलाफ बताया है और उसे निरस्त करने की मांग की है। साथ ही 2000 के नोट को जमा करने वाले के ही बैंक खाते में जमा करने का निर्देश देने की मांग की है, जिससे उसे किसी अन्य के खाते में जमा नहीं किया जा सके और उससे काला धन और आय से अधिक संपत्ति रखने वालों की आसानी से पहचान हो सके।
याचिकाकर्ता ने इसके अलावा कोर्ट से भ्रष्टाचार, बेनामी लेनदेन को समाप्त करने और नागरिकों के मौलिक अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए काले धन और आय से अधिक संपत्ति धारकों के खिलाफ उचित कदम उठाने के लिए केंद्र सरकार से दिशा-निर्देश देने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने हाल ही में सभी परिवारों के पास आधार कार्ड और बैंक खाता होने की बात कही है। इसके बावजूद आरबीआई रुपए का आदान-प्रदान बिना पहचान पत्र के करने की अनुमति क्यों दे रहा है। उन्होंने कहा कि 80 करोड़ बीपीएल परिवारों को मुफ्त अनाज मिलता है। इसका मतलब है कि 80 करोड़ भारतीय शायद ही कभी 2000 रुपए का उपयोग करते हैं। इसलिए 2000 के नोट सिर्फ बैंक खातों में ही जमा करने के निर्देश दिए जांए।