चिड़ियाघर में दुर्लभ प्रजाति की जापानी नस्ल का सीका हिरण का जोड़ा आ गया है। एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत इन्हें जयपुर चिड़ियाघर से लाया गया है। गर्मी को देखते हुए इनके लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। इनके बाड़ों में कूलर व स्प्रिंकलर लगाए गए हैं। हालांकि, इन्हें अभी क्वारंटीन में रखा गया है।
चिड़ियाघर में सीका हिरण आने से वन्य जीव प्रेमियों में उत्साह है। इसके साथ ही यहां से जयपुर में दो बारहसिंगा को भेजा गया है। यहां सीका हिरण को लाने की लंबे समय से तैयारियां जोरों से चल रही थी। चिड़ियाघर में आने वाले दर्शकों के बीच में अन्य वन्य जीवों की तरह सीका हिरण भी आकर्षक का केंद्र रहते हैं। बता दें यहां बीते वर्ष एक हिरण था, लेकिन कुत्तों ने उस पर हमला कर घायल कर दिया था, जिसके बाद वह मर गया था। सीका हिरण को मिलाकर चिड़ियाघर में वन्यजीवों की प्रजातियों की संख्या 95 से अधिक हो गई है।
ऐसे में काफी समय से इनका बाड़ा खाली पड़ा था। यहां आने वाले नए जानवरों के लिए बाड़े भी तैयार किए गए हैं। सीका हिरण आने से चिड़ियाघर का आकर्षण और अधिक बढ़ेगा। इसके साथ ही जल्द ही और भी वन्य जीवों को यहां लाया जाएगा। चिड़ियाघर के रेंज अधिकारी सौरभ वशिष्ठ ने कहा कि इन्हें लाने के लिए लंबे समय से प्रक्रिया चल रही थी। इनके लिए यह मौसम अच्छा रहता है जिससे यह इस समय ज्यादा सक्रिय रहते हैं। यहां वह खुद को समायोजित कर सकें, इसके लिए उन्हें हरसंभव माहौल उपलब्ध कराया जा रहा है।
इस तरह के होते हैं सीका हिरण
यह हिरण प्रजाति के शर्मीले प्राणी होते हैं और इंसानी आबादी से बचकर रहते हैं। दरअसल, सीका हिरण जापान और उत्तर-पूर्वी के कुछ देशों में पाए जाते हैं। देश में खासकर राजस्थान जैसे प्रदेश के लिए सीका हिरण बहुत दुर्लभ है। यह कंधे से 90 से 120 सेमी, लंबाई में 155 सेमी व वजन 40 किलोग्राम से अधिक होता है। इसमें नर बड़े होते हैं और सींग धारण करते हैं। ग्रीष्मकालीन में इनका रंग हल्के भूरे रंग का हो जाता है, जिसमें स्पष्ट सफेद धब्बे होते हैं, जबकि सर्दियों में उनका रंग गहरा होता है। इसमें इनके धब्बे फीके पड़ जाते हैं।