पहला पन्ना : किसी के लिए इससे अच्छी बात क्या होगी है कि उसने सपना देखा हो और वह सच हो रहा हो। मेरी स्थिति भी ऐसी ही है। दिल्ली की जनता ने 70 विधानसभा की 67 सीट पर जनमत देकर आम आदमी पार्टी‘आप’को सरकार चलाने की जिम्मेदारी सौंपी है।
अब आने वाले समय में हम देश में व्यवस्था परिवर्तन, भ्रष्टाचार का खात्मा, गरीबों और आम जनता की सरकार का स्वरूप देख सकेंगे। ‘आप’ की सरकार ऐसा करके देश की जनता को बदलाव का संदेश देगी। मेरे लिए इससे बड़ा ईनाम क्या हो सकता है।
मेरी इस नई जिंदगी की शुरूआत 28 फरवरी 2013 को हुई थी, जब जामनगर गुजरात से चलकर दिल्ली आया था। तब केंद्रीय विद्यालय में स्पोर्ट्स टीचर था और‘यू ट्यूब’पर अरविंद केजरीवाल के भाषण का वीडियो देखने के बाद नींद नहीं आती थी।
यूं ही नहीं मिली इतनी बड़ी जीत
पत्नी, मनदीप भी रात में मेरा उठकर बैठ जाना देखकर परेशान थी। उसने मेरी इच्छा और समर्पण का भाव देखकर कहा कि दिल्ली जाकर एक बार देख आओ। इसके बाद भी मन शांत न हो तो जो मन कहे करना। घर का खर्चा मैं चलाऊंगी।
मेरे लिए राहत की बात यही थी कि मनदीप केंद्रीय विद्यालय, जामनगर में शिक्षिका थी। दिल्ली आए तो मनीष सिसोदिया के साथ सक्रिय हरेंद्र मिल गए और उन्होंने दिल्ली में रहने का प्रबंध कर दिया।
लेकिन जब मनीष से नौकरी छोड़ने की इच्छा बताई तो उन्होंने चार-पांच दिन सोचकर सच्चाई जानने के बाद नौकरी छोड़ने की सलाह दी। तब मध्यम वर्गीय परिवार, सामान्य पृष्ठभूमि, आर्थिक तथा सामाजिक जिम्मेदारी सब सामने दिखाई देने लगी। लेकिन इसके बावजूद जामनगर गया और नौकरी छोड़कर दिल्ली आ गया। तब से मनीष सिसोदिया के साथ हूं।
क्या कहता है इस डायरी का दूसरा पन्ना
यहां मेरी शुरुआत सुबह छह बजे से होती है। घर से निकलकर सुबह मनीष के साथ पहले तय किसी पार्क में पहुंचना। लोगों से मिलना, क्रिकेट, फुटबाल खेलना, टहलना, टहलते हुए चर्चा करना और 8 से 8:30 बजे तक घर में नाश्ते की टेबल पर लौटना।
दस बजे फिर सिसोदिया के घर कार्यालय की जिम्मेदारी संभालना। लोगों की शिकायतों और कार्रवाई तथा एमसीडी, पीडब्ल्यूडी समेत अन्य सरकारी विभागों की पहल को देखना। मनीष से मिलने वालों को मिलाना-जुलाना। लंच के समय घर पहुंचकर भोजन और दोपहर बाद क्षेत्र में लोगों की शिकायतों पर काम। ‘आपका एमएलए डॉट कॉम’ के माध्यम से लोगों से जुड़ना और रात में 12 बजे तक घर लौट आना।
कुल मिलाकर यही कह सकते हैं कि 50 हजार रूपये लेकर जामनगर से आए थे। सोचा था कि ‘आप’ से न जुड़े तो इसे केजरीवाल को सहयोग के रूप में देकर लौट आएंगे। लेकिन ‘आप’ से जुड़ने के बाद इस पैसे को दिल्ली में अपने खान-पान पर खर्च किया। अभी मनीष के मकान में रहता हूं, पत्नी का तबादला जामनगर से दिल्ली हो गया है और दिल्ली से देश की राजनीति में बड़ा बदलाव होते देख रहा हूं।