ठीक एक साल पहले अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के सीएम पद से इस्तीफा दिया था। तब तत्कालीन विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने केजरीवाल को भगोड़े दूल्हे का तमगा दिया था।
भगोड़ा होने का यह तमगा सभी दलों ने हमला करने के लिए अपना लिया। केजरीवाल तक ही नहीं बल्कि इसकी आलोचना उनके परिवार को भी झेलनी पड़ी। मगर केजरीवाल ने इस तमगे को अपनी ताकत बनाया। दिल्ली की जनता ने उन्हें पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता की चाभी सौंप दी।
केजरीवाल 14 फरवरी 2014 को सीएम पद से इस्तीफा देकर लोकसभा चुनाव में कूद गए थे। दिल्ली छोड़ने के बाद राजनीतिक विरोधियों ने उन्हें भगोड़े का तमगा दे दिया। यह कहा जाने लगा कि वह सरकार चलाने में नाकाम रहे। जनता की उम्मीदों को पूरा नहीं करने के कारण डरकर भाग गए।
विरोधियों ने इसे इस तरह प्रचारित किया गया कि इसका असर परिजनों पर भी पड़ा। स्कूल में उनके बच्चों को, घर से बाहर निकलने पर उनके माता पिता तक को आलोचनाओं का शिकार होना पड़ा। यही नहीं इस दौरान सरकारी नौकरी में उनकी पत्नी को भी कई समस्याओं से दो चार होना पड़ा। नगर निगम में डेपुटेशन की पोस्ट पर आने में भी सत्ताधारी दल की नाराजगी अधिकारियों के सामने आई थी।