मंदिर के स्वामी कृष्ण शाह विद्यार्थी ने बापू के इस मंदिर के एक कमरे में बिताए 214 दिनों के बारे में कहा कि यहां अक्सर उनसे मिलने के लिए लेडी माउंटबेटन, जवाहर लाल नेहरू सहित देश विदेश के कई गणमान्य लोग पहुंचते थे। बापू मंदिर में आयोजित भजन संध्या में भी शामिल होते थे। अभी भी रोजाना बापू के कमरे में अगरबत्ती जलाई जाती है और पुष्प अर्पित किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने एक अप्रैल, 1946 से जून 1947 के बीच 214 दिन बिताए थे।
इस दौरान उनसे मुलाकात के लिए लोग पहुंचते थे। बापू की विचारधारा से प्रेरित स्वामी कृष्ण शाह विद्यार्थी ने बताया कि यहां पुण्यतिथि और बापू की जन्मतिथि पर अधिक लोग पहुंचते हैं। साल भर में गांधीजी के जीवन पर अध्ययन करने वाले देश विदेश के शोधार्थी भी यहां पहुंचते हैं। बापू जिस जगह पर बैठकर स्याही से देश के भविष्य के लिए सपनों को कलम से जीवंत रूप में उतारते थे, उनकी यादें अभी ही जिंदा हैं। बापू निवास की दीवारों पर लगी तस्वीरें भले ही धुंधली हो गई और कताई की गई सूत की माला उनके सादा जीवन और उच्च विचार की यादें दिलाती हैं। कमरे में छोटा प्रतीकात्मक चरखा भी है, जो उनकी पहचान था।