बांग्लादेश में चल रही हिंसा का कारोबार पर असर पड़ेगा। व्यापार ठप होने से उपभोक्ताओं पर असर पड़ेगा। दिल्ली के टैंक रोड और गांधी नगर बाजार में मिलने वाले सस्ते कपड़ों पर महंगाई की मार पड़ सकती है। ब्रांडेड कपड़े और जूते पर असर पड़ेगा।
बांग्लादेश में चल रही हिंसा का असर दिल्ली के कारोबार आने वाले समय में दिखाई पड़ सकता है। भारत एक तरह से आयात और निर्यात वाला पार्टनर देश है। लिहाजा रेडीमेड कपड़े समेत सूती धागा, सूती कपड़े और तैयार कपड़ा, मसाला, फुट वेयर, ऑटोमोबाइल पाटर्स, यहां तक की फैंसी टोपी के कारोबार पर भी असर दिख सकता है।
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एक अनुमान के अनुसार, 20 प्रतिशत के करीब व्यापार पर इसका असर देखने को मिल सकता है। क्योंकि बांग्लादेश में हिंसा की वजह से व्यापार पूरी तरह से ठप है। दिल्ली में सूती कपड़ों का एक बड़ा मार्केट टैंक रोड और गांधी नगर है। यहां से रेडीमेड कपड़ों का आयात और निर्यात भी होता है।
लिहाजा अब इन मार्केट में इसका असर स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा और होजियरी समेत अन्य रेडीमेड कपड़ों का बाजार महंगा होगा। खास बात यह भी है कि इसका असर पूरे देश में पड़ेगा क्योंकि दोनों होलसेल मार्केट से कपड़ों का व्यापार होता है।
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दूसरी तरफ उच्च गुणवत्ता के रेडीमेड गारमेंट बांग्लादेश में ही सस्ती लेबर और कच्चे माल की उपलब्धता की वजह से बनते है। कपड़ों की फिनिशिंग और गुणवत्ता बेहतर मानी जाती है। तमाम बड़ें ब्रांड बांग्लादेश में कपड़ें को तैयार करवाते है। लिहाजा ये भी महंगे हो जाएंगे।
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दिल्ली के उद्योग को मिलेगा बढ़ावा और मजदूरों को काम
बांग्लादेश से कारोबार बंद होने से दिल्ली के उद्योग और कारोबार को बूस्ट मिलने की उम्मीद है। टैंक रोड रेडिमेड गारमेंट्स एंड क्लॉथ डीलर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष सतवंत सिंह का कहना है कि बांग्लादेश मैन्यूफैक्चरिंग हब बन गया था। दिल्ली से करोड़ों का कारोबार हो रहा था। सरकार अगर सहूलियत देगी तो दिल्ली समेत अन्य राज्य भी मैन्यूफैक्चरर्स हब बन सकेंगे।
होजियरी गारमेंट्स महंगा होगा। क्योंकि डेनिम कपड़ा अब हर लोग पहनना चाहता है और यह प्रोडक्ट बांग्लादेश में भी बनता है। अब मजबूरन अपने देश में ही इंडस्ट्री लगानी होगी। अंतरराष्ट्रीय कंपनी भी अब बांग्लादेश की जगह गुणवत्ता वाले कपड़े निर्मित करवाएंगे।
व्यापार हो गया ठप, नुकसान भी कम नहीं
बांग्लादेश में हिंसा की वजह से व्यापार का काफी नुकसान हुआ है। परिधान उद्योग चलाने के लिए भारत से ही धागा, बटन, सूई जाता था। यह अब सब फंस गया है। उद्यमी वीरेंद्र नागपाल ने बताया कि व्यापारियों की परेशानी बढ़ गई है क्योंकि वहां उद्योग चलाने के लिए ज्यादातर सामान भेजा जाता था।
यह सब अब रास्ते में ही फंस गया है। कई लोग तो बांग्लादेश में ही इंडस्ट्री बैठा लिए थे और रेडिमेड गारमेंट्स का मैन्यूफ्रेक्चरिंग करने लगे थे। करोड़ों रुपये का निर्यात होता है। अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सूई तक बांग्लादेश भारत से ही जाता था। स्पोट्स का काफी सामान बांग्लादेश निर्यात होता था इसपर भी असर पड़ेगा।
उद्योग नगर के जूता फैक्टरी को होगा नुकसान
दिल्ली के उद्योग नगर में जूता बनाने की फैक्टरियां बड़ी संख्या में है। यहां से जूतों का निर्यात बांग्लादेश किया जाता है। एमएसएमई परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक गुप्ता ने बताया कि जूतों के निर्यात पर इसका असर दिखेगा। हालांकि दिल्ली समेत देश के अन्य हिस्सों में भी जूते का बड़ा बाजार है, लिहाजा ज्यादा नुकसान होने की उम्मीद नहीं है।
हालांकि आयात-निर्यात बंद होने से उद्यमियों को जरूर इसका नुकसान उठाना पड़ेगा। फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन के चेयरमैन परमजीत सिंह पम्मा का कहना है कि सदर बाजार से कॉस्मेटिक, अति विशिष्ट ज्वेलरी, टेलरिंग मटेरियल और होजियरी का व्यापार बांग्लादेश से होता है।