बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के अनुसार, बीते छह वर्षों में कम से कम पांच तेंदुओं की पास से गुजरने वाली सड़क पर दुर्घटना में मौत हुई है। वन्यजीव अभयारण्य के चारों ओर भारी यातायात प्रवाह वाली तीन प्रमुख सड़कें हैं। इसमें सूरजकुंड-फरीदाबाद रोड, गुड़गांव-फरीदाबाद रोड, और महरौली-बदरपुर रोड शामिल है। इसके अलावा दक्षिणी दिल्ली के छतरपुर से फरीदाबाद के मांगर गांव तक भी एक रास्ता अभयारण्य से होकर गुजरता है।
वन विभाग ने अप्रैल में हिरण के एक जोड़े को गोल्फ क्लब से अभयारण्य में विस्थापित कर दिया था, लेकिन भीषण गर्मी ने बाकी हिरणों के विस्थापन में बाधा उत्पन्न की। हिरण को न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप के साथ प्राकृतिक वातावरण की आवश्यकता होती है। अधिकारियों का कहना है कि स्थानांतरण से तेंदुओं के शिकार में सुधार होगा। बता दें कि 2010 से 2019 के बीच राजस्थान वन विभाग ने दिल्ली गोल्फ क्लब से रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान में कई सांभर हिरण को विस्थापित किया था। असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य दक्षिणी दिल्ली में 32.71 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ है। यह उत्तरी अरावली तेंदुए वन्यजीव गलियारे का हिस्सा है, जो राजस्थान के सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान से दिल्ली रिज तक फैला हुआ है।