परिवहन विभाग ने अब प्रदेश के शहरों के अंदर रेडियो टैक्सी-सिटी बसें चलाने की योजना शुरू की है। पहले चरण में गाजियाबाद सहित प्रदेश के सभी 13 नगर निगम में इसकी शुरुआत की गई है।
पॉल्यूशन और जाम को नियंत्रित करने के लिए शहरों से आटो को बाहर कर सिटी बस और रेडियो टैक्सी चलाने का प्रस्ताव है। इसके लिए 31 अगस्त तक आवेदन मांगे गए हैं।
शहर के ज्यादातर मार्ग जाम की चपेट में हैं। प्रमुख चौराहों और मार्गों पर आटो के चलते दिनभर जाम रहता है। करीब 28 हजार आटो की मनमानी पर नियंत्रण कर पाने में पुलिस और परिवहन अफसर नाकाम हो रहे हैं।
परिवहन विभाग ने शहरों के अंदर से आटो को बाहर करने की योजना तैयार की है। इसकी शुरुआत सूबे के 13 नगर निगम वाले शहरों से की जाएगी।
डीएम से बैठक के बाद एआरटीओ केपी गुप्ता ने बताया कि शहरों के अंदर पब्लिक ट्रांसपोर्ट के रूप में सिटी बसों और रेडियो टैक्सियों का संचालन होगा। इनका किराया इतना रखा जाएगा, जिसे आम आदमी भी वहन कर सके।
इसके लिए कोई भी व्यक्ति या उनका समूह 31 अगस्त तक आवेदन कर सकेगा। इसके लिए आवेदन परिवहन विभाग की साइट www.uptransport.org पर जाकर डाउनलोड किया जा सकता है।
इन 13 शहरों में लागू होगी योजना
गाजियाबाद, कानपुर, इलाहाबाद, बरेली, मेरठ, लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मुरादाबाद, सहारनपुर, अलीगढ़, झांसी और गोरखपुर।
पहले फ्लॉप हो चुकी है योजना
आटो चालकों की मनमानी से पिछले वर्ष चलाई गई सिटी बस योजना फ्लॉप हो गई थी। आटो को आड़ा-तिरछा लगाकर बसों को रोकने, चालक-परिचालक से मारपीट करने और किराए में कमी करने से बसों का संचालन ठप हो गया था।
यदि आटो चालकों को काबू नहीं किया गया तो रेडियो टैक्सी और सिटी बसों का संचालन सफल होने में फिर संशय है।