दिल्ली से परिचित केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने हर वर्ग को बजट में सौगात दी है। उन्होंने ऐसे पहलुओं को छूने की कोशिश की जो सीधे तौर पर परेशान कर रही थीं।
कोई नया कर नहीं लगाया तो किसी तरह के कर में राहत की घोषणा भी नहीं की, ताकि सरकारी खजाने और जनता की जेब का संतुलन बना रहे।
हालांकि, विधानसभा चुनाव में भाजपा ने बिजली 30 फीसदी सस्ती करने व नए कॉलेज खोलने सहित कई वादों को पूरा नहीं किया है।
जेटली ने नहीं दी राहत
विधानसभा चुनाव को देखते हुए पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने 2013-14 के बजट में कोई कर नहीं लगाया था, बल्कि तमाम वस्तुओं से वैट हटाने या कम करने की घोषणा की थी। जबकि जेटली ने कर प्रावधान में कोई राहत की घोषणा नहीं की है।
ऐसे में व्यापारी वर्ग को नई केलकुलेशन से मुक्ति जरूर मिली है। इतना ही नहीं सामाजिक क्षेत्र के बजट में कमी की गई है।
इस वर्ष केंद्र सरकार की सहायता वाली योजना को छोड़कर सिर्फ 1862 करोड़ रुपये दिए गए हैं। यह बजट का 11.1 फीसदी है।
किसे क्या दी सौगात
पेंशन पर 3.90 लाख पर लगी सीमा हटाकर 4.30 लाख बुजुर्गों को लाभ पहुंचाया है।
नया मेडिकल कॉलेज, रोहिणी में 100 सीटों वाला मेडिकल कॉलेज, 20 नए सरकारी स्कूल, आईपीयू का एक नियोजन, वास्तुकला व डिजाइन विद्यालय, दक्षिण दिल्ली में एक मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल, तीन नई फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी, एक कौशल विकास केंद्र, मानसिक मरीजों के लिए तीन नए केंद्र, कामकाज महिलाओं के लिए छह नए हॉस्टल, नरेला में 158 करोड़ की लागत से राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान बनेगा।
पेयजल के लिए 500 एटीएम, सात नए रैन बसेरे, झुग्गी-झोपड़ी में शौचालय के लिए 35 करोड़ रुपये, अनधिकृत कॉलोनियों में अनिवार्य सुविधाओं के लिए 711 करोड़ रुपये।
यमुना को बचाने के लिए कवायद
बजट के रास्ते केंद्र सरकार ने यमुना में जान डालने की कोशिश की है। सरकार का जोर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की क्षमता बढ़ाने के साथ ही पुरानी परियोजनाओं को पूरा करने पर है।
सरकार ने मौजूदा वित्तीय वर्ष में जल निकासी की व्यवस्था में सुधार के लिए 750.8 करोड़ रुपये खर्च का प्रस्ताव रखा है। साथ ही यमुना के तटों के सौंदर्यीकरण का भी प्रस्ताव रखा गया है। अरुण जेटली ने बताया कि यमुना को बचाने के लिए दिल्ली सरकार ने कई प्रस्ताव तैयार किए हैं।
वित्त मंत्री ने संसद में ऐलान किया कि सरकार की योजना सिंगापुर की तकनीक पर 40 एमजीडी क्षमता का एसटीपी लगाने की है।
जानिए क्या है प्लान?
प्लांट पल्ला के नजदीक लगाया जाएगा। इससे शोधित पानी यमुना में डाला जाएगा। इससे वजीराबाद जल शोधन संयंत्र को अतिरिक्त पानी मिल सकेगा। इसके अलावा पप्पन कलां, निलोठी, यमुना विहार व दिल्ली गेट के एसटीपी इस साल के आखिर तक तैयार हो जाएंगे।
इससे सीवेज शोधन क्षमता 604 से बढ़कर 648 एमजीडी हो जाएगी। वहीं, 1976 करोड़ रुपये की लागत से इंटरसेप्टर बिछाने की योजना अगले साल जून तक पूरी होगी। इससे दिल्ली का सारा सीवेज यमुना में पहुंचने से पहले साफ कर लिया जाएगा।
हादसों पर लगाम लगाने की कोशिश
राजधानी की सड़कों पर बढ़ते हादसे को रोकने के लिए बजट में खास प्रावधान किया गया है। इस बार बजट में जागरूकता अभियान व ड्राइविंग स्कूल के अलावा मोबाइल मजिस्ट्रेट का प्रावधान किया है।
ये वाहन चालकों पर नजर रखने के साथ ही उन्हें गलत ड्राइविंग करने पर सजा भी देंगे। बजट में इसके लिए फिलहाल चार लाख रुपये रखे गए हैं।
परिवहन क्षेत्र के लिए जारी फंड में ही इसका जिक्र है। बजट में राहगीरों का भी खास ध्यान रखा गया है। सड़क हादसों को रोकने के लिए अध्ययन और अनुसंधान के मद में फंड का प्रावधान किया गया है। बुराड़ी, लोनी, सराय काले खां और नजफगढ़ में मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल बनाने व पहले से मौजूद स्कूलों को अपग्रेड किया जाएगा। इसके लिए योजना मद और गैर योजना मद में 65 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।