आबकारी नीति मामले में आरोपी आप सांसद संजय सिंह ने कहा कि उन्हें फर्जी मामले में फंसाया गया है। इस मामले में दाखिल चार आरोप पत्रों में उनका नाम नहीं है, लेकिन अचानक उन्हें मुख्य साजिशकर्ता बता दिया गया। उन्होंने अदालत के समक्ष अपनी जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान यह तर्क रखा।
राऊज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश एमके नागपाल के समक्ष आबकारी नीति मामले में गिरफ्तार सांसद संजय सिंह के वकील ने उनकी ओर से पक्ष रखा। अब आगे की सुनवाई 9 दिसंबर को होगी। उस दिन प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) अपना पक्ष रख सकता है। वहीं न्यायाधीश ने इसी मामले के आरोपी शराब की दिग्गज कंपनी पेरनोड रिकॉर्ड के अधिकारी बिनॉय बाबू को अंतरिम जमानत देने से इन्कार कर दिया है।
सांसद सिंह के वकील ने अदालत से कहा कि उनके मुवक्किल जमीन से जुड़े नेता हैं जो कभी देश छोड़कर बाहर नहीं जा सकते। समाज में उनकी प्रतिष्ठा है। वकील ने कहा कि 15 महीने तक जांच एजेंसी ने एक बार भी मेरे द्वारा जांच या सबूत को प्रभावित करने की बात नहीं कही है। उस दौरान कोई पूछताछ नहीं की गई। उस दौरान कोई आरोप भी नहीं लगाया गया। यहां तक कि इस मामले में दाखिल चार आरोप पत्रों में उनका नाम नहीं है, लेकिन अचानक उन्हें मुख्य साजिशकर्ता बता दिया गया है।
वकील ने कहा कि जांच एजेंसी का गोल पोस्ट लगातार बदल रहा है। मनीष सिसोदिया के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था, उसमें उनके मुवक्किल के कंपनी को दो करोड़ रुपये मिलने का जिक्र भी नहीं था। उन्होंने इसके साथ ही सरकारी गवाह दिनेश अरोड़ा के बयान की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया। वकील ने कहा कि जो शख्स कभी इस केस में आरोपी था, उसके बयान की कितनी विश्वसनीयता है। क्या ये माना जा सकता है कि बिना किसी दबाव, प्रलोभन के उसने संजय सिंह के खिलाफ बयान दिया हो। अरोड़ा 14 अगस्त को एक बयान देता है और 4 अक्तूबर को ये बयान गिरफ्तारी की वजह बनता है।