खेतों में पैदावार बढ़ाने के लिए कीटनाशक व रसायन का इस्तेमाल करने से कीटों की संख्या में भारी गिरावट आ रही है, इसलिए यह चिंता का विषय है। वर्ष 2020 में इस प्रक्रिया को लाने की तैयारी चल रही थी, जिसमें 3 माह पहले से इसमें बढ़े स्तर पर कार्य किया। इसका असर देखने को मिल रहा है। लोगों को जागरूक कर इनकी भूमिका के बारे में बताया जाएगा। -डॉ. शाह हुसैन, इंचार्ज, अरावली जैव विविधता पार्क
फसल परागणक में अहम भूमिका निभाते हैं कीट
जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से खेत-खलिहानों में पाए जाने वाले सामान्य कीटों की संख्या में कमी आई है। यह कीड़े हमारे ग्रह के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण हैं, वे कीट प्रजातियों को नियंत्रण में रखने में मदद करते हैं और मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी को दूर करने की प्रक्रिया का प्रमुख हिस्सा होते हैं, उड़ने वाले कीड़े कई प्रमुख खाद्य फसलों के प्रमुख परागणक भी होते हैं।
पारिस्थितिकी तंत्र को स्वस्थ बनाने में करते हैं मदद
वर्तमान में देश जलवायु परिवर्तन की समस्या से जूझ रहा है। इसका मनुष्य पर ही नहीं, जीव-जंतुओं पर भी प्रभाव पड़ रहा है। खेतों में अधिक पैदावार बढ़ाने के लिए कीटनाशक व रसायन का अधिक इस्तेमाल करने से कीट-पतंगों पर इसका प्रतिकूल असर देखने को मिल रहा है। ऐसे में अरावली जैव विविधता पार्क इनके लिए नया आशियाना बन रहा है। यह पारिस्थितिकी तंत्र को स्वस्थ बनाने में मदद करते हैं। जैव विविधता पार्क के अधिकारी ने बताया कि शहरी जनजीवन के लिए इनका संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है। पार्क के भीतर इनकी आबादी को संरक्षित करने, जैव विविधता को बढ़ावा देने और स्थानीय समुदाय के बीच उनके महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने में मदद मिल रही है। उन्होंने बताया कि वे इनकी प्रजातियों के बारे में भी पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं, जिसमें से कई प्रजातियां अभी भी खोजे जाने की प्रतीक्षा कर रही हैं।