उपराज्यपाल पद पर अनिल बैजल का कार्यालय दिल्ली सरकार के साथ विवादों से जुड़ा रहा। खास तौर पर उनके व दिल्ली सरकार के बीच अधिकारों को लेकर निरंतर टकराव देखने को मिला। उनके बीच विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। इसके अलावा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एवं उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के साथ-साथ दिल्ली विधानसभा की बैठकों में भी उपराज्यपाल की कार्यशैली पर सवाल उठाए गए। आगे पढ़ें उनका अब तक का सफर कैसा रहा...
वाजपेयी सरकार में रहे केंद्रीय गृह सचिव
उपराज्यपाल पद से पहले 1969 बैच के आईएएस अधिकार रहे अनिल बैजल ने अनेक बड़े पदों पर सेवाएं दी। वह दिल्ली के 21वें उपराज्यपाल बनाए गए थे। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय गृह सचिव के रूप में काम किया था।
बैजल ने किरण बेदी के खिलाफ की थी कार्रवाई
केंद्रीय गृह सचिव रहते हुए ही उन्होंने किरण बेदी पर कार्रवाई की थी और उन्हें हेड ऑफ जेल्स के पद से हटा दिया था। इसके अलावा अनिल बैजल ने कई मंत्रालयों में महत्वपूर्ण पद संभाले।
इन पदों पर भी आसीन रहे बैजल
वह दिल्ली विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वह अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के मुख्य सचिव, इंडियन एयरलाइंस के एमडी, प्रसार भारती के सीईओ, गोवा के विकास आयुक्त, दिल्ली के आयुक्त (बिक्री कर और उत्पाद शुल्क) के पद पर भी रहे। वह वर्ष 2006 में शहरी विकास मंत्रालय के सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद जवाहरलाल नेहरू नेशनल अर्बन रिन्यूअल मिशन से जुड़े रहे।
नजीब जंग के इस्तीफे के बाद बने दिल्ली के एलजी
दिसंबर 2016 में नजीब जंग के बाद अनिल बैजल दिल्ली के उपराज्यपाल बने थे। नजीब जंग की तरह उनके भी मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ मतभेद रहे। कई मामलों को लेकर अनेक बार दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल अनिल बैजल के बीच टकराव की बातें सामने आती रही है। उन्होंने एक साल पहले दिल्ली सरकार की 1000 बसों की खरीद प्रक्रिया की जांच को लेकर तीन सदस्यों की एक कमेटी बना दी थी। इस मसले पर भी दिल्ली सरकार से उनकी काफी खटपट हुई थी। हालांकि प्रदेश भाजपा ने इस मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी।
इस प्रकरण से पहले स्वास्थ्य विभाग से जुड़े मामले में भी उपराज्यपाल से दिल्ली सरकार की अनबन हुई थी। स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन की बजाय खुद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उपराज्यपाल अनिल बैजल को चिट्ठी लिखकर सरकारी अस्पतालों में स्टाफ की कमी को पूरा करने की अपील की थी। इस चिट्ठी में मुख्यमंत्री आरोप लगाया था कि उपराज्यपाल के कहने पर कई अधिकारी स्वास्थ्य मामलों से जुड़ी फाइल छुपा रहे है और मंत्री को भी फाइल देने से इंकार कर रहे है। इस कारण अब खुद उपराज्यपाल ही अस्पतालों में खाली पड़े पदों को जल्द से जल्द भरे।
दिल्ली सरकार एवं उपराज्यपाल के बीच कानून विभाग से जुड़े एक मामले में भी टकराव की स्थिति सामने आई थी। उस समय उपराज्यपाल अनिल बैजल को उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने चिट्ठी लिखकर फाइल और फैसले छुपाने का आरोप लगाया था। उन्होंने लिखा था कि दिल्ली सरकार के लिए स्टैंडिंग काउंसिल और एडिशनल स्टैंडिंग काउंसिल की नियुक्तियों के लिए उनकी राय नहीं ली गई। इतना ही नहीं, उपराज्यपाल के आदेश के कारण अधिकारी फाइल नहीं दिखा रहे। इसके बाद उन्होंने कानून तौर पर टिप्पणी के लिए से फाइल मांगी थी।