स्त्री रोग विशेषज्ञों का कहना है कि अक्सर महिलाएं अपने खाने-पीने पर ध्यान नहीं देती, जिस कारण 50 फीसदी गर्भवती महिलाएं एनीमिया का शिकार हैं। महिलाओं के एनीमिया की वजह से पांच साल तक के 60 फीसदी बच्चों में भी खून की कमी पाई जा रही है।
इस बारे में सफदरजंग अस्पताल प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के डॉक्टर अचला बत्रा का कहना है कि बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं खान-पान का ध्यान नहीं रखती। इस दौरान महिलाएं आयरन की गोली भी समय पर नहीं लेती जिस कारण उनमें खून की कमी पाई जाती है।
सफदरजंग के एक अध्ययन के मुताबिक गर्भधारण करने से पहले अगर महिलाओं को उनकी सेहत, खान पान, जांच और मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग दी जाए तो इससे उन्हें कम वजनी शिशु पैदा होने का खतरा एक चौथाई तक कम हो सकता है। इसके अलावा नवजात की ऊंचाई भी प्रभावित होती है।