ग्रेटर नोएडा उपभोक्ता फोरम ने निजी विश्वविद्यालय को एक छात्र की फीस की बकाया धनराशि वापस लौटाने का आदेश दिया है। विश्वविद्यालय को 30 दिन के अंदर साधारण वार्षिक ब्याज के साथ 96500 लौटाने होंगे।
छात्र के कक्षा में उपस्थित नहीं होने पर विश्वविद्यालय ने प्रवेश निरस्त कर दिया था और जमा फीस 116500 में से मात्र 20 हजार रुपये वापस लौटाए। नोएडा सेक्टर-56 निवासी शुभम टंडन (परिवादी) ने फोरम में एमिटी विश्वविद्यालय के खिलाफ प्रार्थना पत्र दाखिल किया था।
शुभम ने फोरम को बताया कि 9 जुलाई, 13 को उसने पांच साल के बी-आर्क कोर्स में दाखिला लेने के लिए आवेदन किया था। पहली किश्त के रूप में 116500 रुपये का भुगतान डिमांड ड्रॉफ्ट से किया था। विश्वविद्यालय ने भुगतान होने की रसीद भी दी। कुछ दिन बाद ही कक्षाएं शुरू होनी थी, लेकिन वह बीमार हो गया। इसकी सूचना संस्थान को नहीं दे सका।
31 जुलाई, 13 को संस्थान ने प्रवेश निरस्त कर दिया। इसके बाद शुभम ने फीस वापसी के लिए प्रार्थना पत्र दिया। 31 अगस्त, 13 को संस्थान की तरफ से शुभम को पत्र मिला जिसमें देयों को समायोजित करते हुए शुल्क वापस देने का आदेश दिया गया। एमिटी ने केवल 20000 रुपये वापस लौटाए। शुभम ने कई बार संस्थान को पत्र लिखा, लेकिन उन पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
छात्र नहीं है कॉलेज का उपभोक्ता
छात्र के प्रार्थना पत्र पर एमिटी ने उपभोक्ता फोरम में पक्ष रखा और कहा कि यह परिवाद निरस्त होने योग्य है। छात्र उपभोक्ता की श्रेणी में नहीं आता है। सेवा में कोई कमी नहीं है। अगस्त, 2013 में शुभम ने अपना प्रवेश निरस्त करा लिया था। जबकि, नवंबर, 16 में संस्थान को नोटिस मिला है।