इस सेवा का शुभारंभ करते हुए एम्स निदेशक डॉ. एम श्रीनिवास ने कहा कि यह उन मरीजों को राहत देगा, जिन्हें एम्स के डॉक्टरों ने इंसुलिन के लिए लिखा हो। मुफ्त इंसुलिन देने के लिए काउंटर रोजाना सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक खुलेगा। यहां इंसुलिन की शीशियों को सुरक्षित ले जाने व रखने के बारे में जानकारी भी दी जाएगी। वहीं दूर-दराज क्षेत्र से आने वाले मरीजों को बर्फ का पैक भी दिया जाएगा जिनमें इन्हें सुरक्षित रखा जा सकेगा।
इन मुफ्त इंसुलिन को हासिल करने के लिए एम्स के डॉक्टरों को मरीज के पर्ची पर लिखना होगा कि उन्हें कहीं और से दवा नहीं मिल रही है। शुरुआती दौर में मरीजों को एक माह के लिए इंसुलिन उपलब्ध करवाया जाएगा। जिसे आगे चलकर दो से तीन माह तक के लिए बढ़ाया जा सकता है।
वहीं इस मौके पर एम्स के एंडोक्रिनोलॉजी और मेटाबॉलिज्म विभाग के प्रोफेसर और प्रमुख डॉ. निखिल टंडन ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने साल 2030 तक हर मरीज तक मधुमेह की दवा पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इन काउंटर की मदद से जरूरतमंद मरीजों तक मुफ्त सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी।
उन्होंने कहा कि जीवन भर इंसुलिन के इंजेक्शन लेने वाले टाइप-1, टाइप-2 या किसी अन्य प्रकार के मधुमेह रोगियों को इंसुलिन के लिए काफी पैसा खर्च करना पड़ता है। ऐसे में काफी लोग आर्थिक तंगी के कारण यह सुविधा नहीं ले पाते। यह कोशिश उनके लिए मददगार साबित होगी।
वहीं, एम्स मीडिया प्रमुख डॉ. रीमा दादा ने बताया कि खराब जीवन शैली के कारण काफी लोग मधुमेह के शिकार हो रहे हैं। ऐसे में इंसुलिन की मांग बढ़ गई है। यह इंसुलिन 90 रुपये की आती है जिसे रोज लेना होता है। ऐसे में सभी लोग इसे रोज नहीं ले पाते अब इसे मुफ्त में उपलब्ध करवाई जाएगी। साथ ही मरीजों को बताया जाएगा कि इन दवा को कैसे सुरक्षित रखनी है।