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12वीं पास ठग: कारोबारी से एक करोड़ की ठगी... व्हाट्सएप पर लगाई जानकार की डीपी; यहां से लिया था सिम, पकड़ा गया

Tue, 14 Nov 2023 12:17 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

मध्यप्रदेश के कारोबारी से एक करोड़ ठगने वाले आरोपी को पुलिस ने हिमाचल प्रदेश से गिरफ्तार किया है। आरोपी ने व्हॉट्सएप पर जानकार की डीपी लगाकर रुपये ऐंठे थे। पुलिस ने हिमाचल प्रदेश के धर्मपुर से पकड़ा है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media
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विस्तार
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व्हाट्सएप पर फर्जी डीपी (फोटो) लगाकर मध्य प्रदेश के कारोबारी से एक करोड़ रुपये ठगने वाले आरोपी को उत्तरी जिले की लाहौरी गेट थाना पुलिस ने हिमाचल प्रदेश के धर्मपुर के सोलन से गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान राजस्थान के जालौर निवासी सुरेश पुरोहित के रूप में हुई है। सुरेश महज 12वीं कक्षा पास है।
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आरोपी ने साथियों दशरथ और हेमंत जैन के साथ मिलकर कारोबारी से ठगी की थी। पुलिस ने आरोपी के पास से 80 हजार रुपये, ठगी की रकम से खरीदी गई गाड़ी, एक लैपटॉप, छह मोबाइल व अन्य सामान बरामद किया है। अब पुलिस दशरथ और हेमंत की तलाश कर रही है।

आरोपी खुद को कारोबारी का जानकार बनकर उन्हें व्हाट्सएप कॉल करते थे। उनका विश्वास जीतने के लिए आरोपी जानकार के ही फोटो को व्हाॅट्सएप की डीपी के रूप में इस्तेमाल करते थे। पीड़ित से बड़ी इमरजेंसी होने की बात कर दिल्ली में एक करोड़ रुपये मांगे गए थे। बदले में जल्द से जल्द रुपये वापस देने की बात की गई थी। छानबीन में पता चला कि कॉलर ने सिमकार्ड गुरुग्राम में एयरटेल के एक स्टोर से लिया था।
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उत्तरी जिला पुलिस उपायुक्त मनोज कुमार मीना ने बताया कि दो नवंबर को मध्य प्रदेश निवासी प्रदीप जैन नामक कारोबारी ने ठगी की शिकायत दी थी। पीड़ित ने बताया कि उनके जानकार की फोटो लगे एक मोबाइल नंबर से उनके पास कॉल आया। कॉलर ने इमरजेंसी होने की बात कर उनसे दिल्ली में एक करोड़ रुपये मांगे।

रकम को कुछ ही देर में मध्य प्रदेश में दे देने की बात की। विश्वास कर प्रदीप जैन ने दिल्ली में अपनी टीम से रकम दिलवा दी। इसके बाद जब उन्होंने फोटो वाले असली व्यक्ति को कॉल किया, तो उसने किसी भी इमरजेंसी और रुपये लेने की बात से इन्कार कर दिया। पीड़ित ने फौरन मामले की शिकायत पुलिस से की।

 

लाहौरी गेट थाने में मामला दर्ज कर लिया गया। जांच चर्च मिशन रोड, चौकी इंचार्ज रणविजय व अन्य ने शुरू की। जिस नंबर से कॉल कर रकम मांगी गई थी उसकी जांच शुरू की। छानबीन में पता चला कि कॉलर ने सिमकार्ड गुरुग्राम में एयरटेल स्टोर से लिया था। काले रंग की गाड़ी में आरोपी सिम लेने आया था।

ऐसे पकड़ा गया आरोपी
पुलिस ने कॉलर की लोकेशन की जांच की। व्हाट्सएप कॉल की लोकेशन शिमला की मिली, जबकि उसका सिमकार्ड राजस्थान में होने का पता चला। पुलिस ने पड़ताल कर आरोपी की लोकेशन शिमला में ट्रेस की। बाद में एक टीम को हिमाचल प्रदेश के धर्मपुर के सोलन भेजा गया। वहां पर धर्मपुर लोकल पुलिस की मदद से आरोपी को दबोच लिया गया। 

 

पूछताछ के दौरान आरोपी ने वारदात में अपना हाथ होने की बात कबूल कर ली। आरोपी ने बताया कि उसने दशरथ और हेमंत जैन नामक साथियों संग मिलकर वारदात को अंजाम दिया था। ठगी की रकम को इन लोगों ने तीन जगह बांट लिया था। 

 

सुरेश के हिस्से में 40 लाख रुपये आए थे। ठगी की रकम में से 35 लाख रुपये इसने पैतृक गांव जालौर, राजस्थान में भेज दिए थे। बाकी चार लाख रुपये अपने ऊपर खर्च कर लिए। इसके अलावा आरोपी के पास से 80 हजार रुपये बरामद हो गए। अब पुलिस बाकी दोनों आरोपियों की तलाश कर रही है।

 

पुलिस को गुमराह करने के लिए सिमकार्ड की लोकेशन दूसरी जगह दिखाते थे
आरोपी फर्जी कागजात के आधार पर अपने जानकार की मदद से गुरुग्राम से सिमकार्ड निकलवा लेते थे। इसके बाद नंबर पर व्हाट्सएप चालू कर उसे वाईफाई से एक्टिवेट कर लिया जाता था। बाद में मोबाइल से सिमकार्ड निकालकर उसे दूसरे फोन में डाल दिया जाता था। बाद में व्हाट्सएप नंबर से कारोबारियों को उनका जानकार बनकर कॉल की जाती थी। 

 
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विश्वास जीतने के लिए आरोपी पीड़ित के जानकार की व्हाट्सएप पर फोटो लगा लेते थे। इसकी वजह से पीड़ित बड़े आराम से रुपये दे दिए करते थे। पुलिस को गुमराह करने के लिए आरोपी सिमकार्ड की लोकेशन को दूसरी जगह दिखाते थे। मौजूदा मामले में सिमकार्ड की लोकेशन राजस्थान और व्हाट्सएप की लोकेशन शिमला की आ रही थी।
 
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