पूर्व अध्यक्ष और यूपीए चेयरमैन सोनिया गांधी के कांग्रेस का अंतरिम अध्यक्ष बनने के बाद प्रदेश के कार्यकर्ताओं की उम्मीदें बढ़ गई हैं। प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर है। इसे देखते हुए माना जा रहा है कि कुछ ही दिन में पार्टी को नया प्रदेशाध्यक्ष मिल सकता है।
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दिल्ली विधानसभा के चुनाव नजदीक हैं। आप और भाजपा पूरी रणनीति के साथ प्रचार में जुट गई हैं। कांग्रेस में अभी प्रदेश नेतृत्व ही नहीं तय है। ऐसे में गुटबाजी पर तुरंत विराम जरूरी है। हारून यूसुफ, राजेश लिलोठिया और देवेंद्र यादव कार्यकारी अध्यक्ष हैं, लेकिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विधानसभा चुनाव पर नजर लगाए हैं। कयास है कि दिवंगत शीला दीक्षित के उत्तराधिकारी का नाम जल्द घोषित कर गुटबाजी को रोका जाएगा। इसके बाद ही प्रदेश कांग्रेस चुनावी तैयारी में जुट पाएगी।
पार्टी के नेताओं का मानना है कि नए अध्यक्ष का नाम सोनिया गांधी तय करेंगी। इससे सभी कार्यकर्ताओं में संदेश जाएगा कि उसकी खिलाफत सीधे आलाकमान के फैसले को नकारना होगा। इसे पार्टी से बगावत माना जाएगा। इन हालात में कोई भी गुट नए प्रदेशाध्यक्ष के फैसलों को नजरंदाज नहीं कर सकेगा।
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उधर, प्रदेश के नेताओं का मानना है कि दिल्ली पर प्रियंका गांधी और राहुल गांधी की भी नजर रहेगी। चुनाव प्रचार और रणनीति में भी दोनों नेताओं का दखल रहेगा. ऐसे में पार्टी को हर हाल में एकजुटता दिखानी पड़ेगी।