एम्स से मिली जानकारी के मुताबिक, करीब 30 साल के संतोष को गंभीर रूप से चोटें आई थीं। अलीगढ़ से शिफ्ट करने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया। करीब सात दिनों तक उनकी हालत में उतार-चढ़ाव होता रहा और आखिरकार उन्होंने 14 अक्तूबर को दम तोड़ दिया। ब्रेन डेड घोषित होने के तुरंत बाद डॉक्टरों ने परिवार से संपर्क साधा। एम्स के अंग पुनर्प्राप्ति बैंकिंग संगठन (ओआरबीओ) ने परिवार को अंगदान के बारे में विस्तार से बताया। ओआरबीओ की प्रभारी प्रोफेसर डॉ. आरती विज ने कहा कि संतोष के परिवार ने दुख की खड़ी में भी दूसरों को जिंदगी देने को प्राथमिकता दी। यह सबसे बढ़ी मानवता है।
वहीं संतोष के अंकल ऋषिचंद्र ने कहा कि हर किसी को अंग दान पर विचार करना चाहिए। संतोष कुमार एक ईमानदार व्यक्ति थे। उन्होंने स्नातक तक की शिक्षा पूरी की और खेती के माध्यम से अपने परिवार को वित्तीय सहायता प्रदान कर रहे थे। संतोष अपने दो भाइयों और पांच बहनों के साथ अलीगढ़ में रहते थे। परिवार की सहमति के बाद उनका दिल और लीवर, एक किडनी दिल्ली के एम्स अस्पताल में आवंटित किया गया था, जबकि दूसरी किडनी आरएमएल अस्पताल को आवंटित की गई।