डॉ. संजय राय
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कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए दुनिया भर के लोग लंबे समय से वैक्सीन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इसे लेकर कई तरह की संभावनाएं जताई जा रही हैं, कई स्तर पर तैयारी की जा रही है। इसी बीच एम्स में 'कोवैक्सीन' के ट्रायल के प्रमुख अन्वेषक और सेंटर फॉर कम्यूनिटी मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. संजय राय ने कहा है कि किसी भी प्रतिरक्षण के बाद शरीर में प्रतिकूल बदलाव हो सकते हैं।
इसमें कुछ परेशानियां बुखार और दर्द जैसी हल्की होती हैं, जबकि कुछ टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम या एनाफिलेक्टिक शॉक की तरह गंभीर भी हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की परेशानियां 'कोवैक्सीन' लगने के बाद भी हो सकती है। इसके लिए हमें पहले से तैयार रहना चाहिए।
जहां वैक्सीन दी जानी है, वहां व्यवस्था की जा रही है। सरकार के दिशा-निर्देशों में यह भी प्रावधान है कि यदि किसी स्थान पर सरकारी सुविधाएं अच्छी नहीं हैं, तो प्राइवेट सेक्टर के साथ मिलकर काम किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि भारत बायोटेक द्वारा बनाई गई कोवैक्सीन के तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल के लिए वॉलंटियर्स कम हैं। उन्होंने बताया कि जब कोवैक्सीन का ट्रायल शुरू हुआ था तो हमें केवल 100 लोगों की जरूरत थी, लेकिन 4500 एप्लिकेशन आए थे। दूसरे चरण में 50 की आवश्यकता थी और 4000 एप्लीकेशन आए थे। अब जब तीसरे चरण के ट्रायल के लिए हमें 1500-2000 लोगों की जरूरत है तो हमें केवल 200 लोग मिल पाए हैं।
ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि लोग सोचते हैं कि जब सभी के लिए वैक्सीन आ रही है तो हम ट्रायल के लिए वॉलंटियर क्यों बनें। डॉ. राय ने कहा कि देश भर में लोगों को वैक्सीन को लेकर उत्साह है, लेकिन उसके क्लीनिकल ट्रायल में दिलचस्पी नहीं है।