दिल्ली जलबोर्ड में कथित रूप से हुए 20 करोड़ के घोटाले में एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक शाखा) ने सोमवार रात को एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की। इस बार एसीबी ने दिल्ली जलबोर्ड के संयुक्त निदेशक एडमिन (ज्वाइंट डायरेक्टर एडमिन) को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान राजेंद्र नगर, गाजियाबाद निवासी नरेश सिंह (48) के रूप में हुई है।
आरोप है कि निजी कंपनियों से साठगांठ कर नरेश ने इन कंपनियों के कांट्रेक्ट को बढ़वाने में मदद की। वर्ष 2015 से 2020 के बीच निजी कंपनी फ्रेश-पे आईटी सॉल्यूशन और ऑरम ई-पेमेंट्स गलत तरीके से बिल वसूलते रहे। इसमें नरेश सिंह ने इनकी मदद की। बदले में लाखों रुपये की रकम रिश्वत के रूप में ली गई। बता दें कि एक सप्ताह के भीतर एसीबी ने चार लोगों को घोटाले के मामले में गिरफ्तार कर लिया है।
अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच
एसीबी प्रमुख व संयुक्त आयुक्त मधुर वर्मा ने बताया कि नरेश सिंह की गिरफ्तारी से पूर्व 13 फरवरी को एसीबी ने निजी कंपनी कंपनी फ्रेश-पे आईटी सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड और ऑरम ई पेमेंट के तीन लोग, कंपनी के मालिक व निदेशक राजेंद्रन के. नायर उर्फ राजू, सीएफओ गोपी कुमार केडिया और निदेशक डॉ. अभिलाश वासुकुट्टन पिल्लई को गिरफ्तार किया था। इन लोगों ने दिल्ली जलबोर्ड के विभिन्न क्योस्क के जरिये करोड़ों रुपये इकट्ठे करने के बाद जलबोर्ड के खातों में रकम न भेजकर अपने खातों में रकम भेजी थी। बाद में जब रकम जमा की गई तो इसमें करोड़ों का अंतर पाया गया। जांच में आरोप सही पाए जाने पर इनकी गिरफ्तारी की गई थी। छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला कि हेराफेरी करवाने में दिल्ली जलबोर्ड के अधिकारियों की भी मिलीभगत है। जांच में नरेश सिंह का नाम आने पर सोमवार को उन्हें गिरफ्तार किया गया है। घोटाले के मामले में जलबोर्ड के बाकी अधिकारियों व बैंक के लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
2019 में हुआ था गड़बड़ी का खुलासा
बता दें कि वर्ष 2012 में दिल्ली जलबोर्ड ने कॉर्पोरेशन बैंक को तीन साल के लिए पानी का बिल एकत्रित करने के लिए अधिकृत किया था। बैंक ने इसकी जिम्मेदारी एक निजी कंपनी फ्रेश-पे आईटी सॉल्यूशन को दे दी। इस कंपनी ने कैश कलेक्शन की जिम्मेदारी अपनी सहयोगी कंपनी ऑरम ई पेमेंट्स व अन्यों को दे दी। अनुबंध की समय सीमा समाप्त होने के बाद उसे समय-समय पर बढ़ा दिया गया। इस दौरान 2019 में गड़बड़ी का खुलासा हुआ तो भी उनके पास यह अधिकार जारी रखा गया। आरोप लगे कि दिल्ली जलबोर्ड के अधिकारियों ने निजी कंपनी व बैंक के साथ मिलकर करोड़ों की हेराफेरी की। मामला संज्ञान में आने के बाद सितंबर 2022 में उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने इस संबंध में मुख्य सचिव को जांच करवा कर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। एसीबी ने 12 नवंबर 2022 को भ्रष्टाचार अधिनियम 1988 के अलावा धोखाधड़ी, अमानत में ख्यानत और आपराधिक षडयंत्र का मामला दर्ज कर लिया था।