एम्स में मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़
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एम्स के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) ने गर्व से अपने वार्षिक शैक्षणिक सम्मेलन आरडीएसीओएन 2024 की मेजबानी की। इसमें स्वास्थ्य देखभाल, स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता में पेशेवरों की एक उल्लेखनीय सभा को एक साथ लाया गया। भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में यह प्रतिष्ठित कार्यक्रम सभी उपस्थित लोगों के लिए एक ज्ञानवर्धक और विचारोत्तेजक अनुभव साबित हुआ।
मुख्य न्यायाधीश डॉक्टर धनजंय यशवंत चंद्रचूड़ ने कहा कि डॉक्टरों को बिना किसी दबाव में आकर में आकर मरीजों के उपचार पर ध्यान देना चाहिए। डॉक्टर ही भगवान का दूसरा रूप होते हैं। इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ द्वारा दिया गया मुख्य भाषण था। उन्होंने समाज में उनकी पूरक भूमिकाओं को रेखांकित करते हुए चिकित्सा और कानूनी व्यवसायों के बीच आवश्यक सहयोग पर जोर दिया। मुख्य न्यायाधीश ने एलजीबीटीक्यू समुदाय के अधिकारों पर भी बात की, व्यक्तिगत उपाख्यानों को साझा किया और स्वास्थ्य देखभाल में समावेशिता के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि डॉक्टरों को कभी किसी लालच में नहीं आना चाहिए, क्योंकि डॉक्टर पर मरीजों को बचाने की जिम्मेदारी होती है। डॉक्टर यदि लालच व दबाव में आ जाएगा तो मरीजों को नहीं बचा सकता। एम्स के डॉक्टर अच्छा कार्य करते हैं और एम्स में आने वाले मरिजों को डॉक्टर से काफी उम्मीद रहती है। यहां के डॉक्टर मरीजों के प्रति काफी गंभीर रहते हैं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि एम्स से अच्छा डॉक्टर कहीं नहीं हैं, जब किसी मरीज को गंभीर बीमारी होती है तो उसका उपचार करने के लिए डॉक्टर को कठिन निर्णय लेना पड़ता है।एम्स में सबसे पहले वह अपने परिजन का उपचार कराने के लिए आए थे और उसके बाद यहां घूमने के लिए आते थे। एम्स में आकर काफी अच्छा लगता है। इस मौके पर एम्स के डायरेक्टर डॉक्टर श्रीनिवास, डॉक्टर विनय और डॉक्टर रीमा व अन्य लोग मौजूद रहे।