सिटी बस सेवा के तहत नोएडा व ग्रेटर नोएडा में सिर्फ वातानुकूलित बसें ही चलाई जाएंगी। लगभग छह माह में ये बसें चलनी शुरू हो जाएगी। प्राधिकरण किराये पर सब्सिडी देगा, जिससे किराया भी सामान्य होगा।
प्राधिकरण के चेयरमैन रमा रमण की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को प्री बिड बैठक हुई। इसमें सिटी बस सेवा प्रोजेक्ट की सलाहकार कंपनी यूएमटीसी के अलावा आधा दर्जन बस ऑपरेटर भी शामिल हुए।
बैठक में प्राधिकरण ने स्पष्ट कर दिया कि सिटी बस सेवा के तहत नोएडा व ग्रेटर नोएडा के अंदरूनी रूटों के अलावा दोनों के बीच चलने वाली सभी बसें वातानुकूलित होंगी।
इनकी संख्या 100 होगी, जिसमें से 40 बसें नोएडा और 30 बसें ग्रेटर नोएडा में चलेंगी। बाकी 30 बसें नोएडा-ग्रेटर नोएडा के बीच चलेंगी। ये बसें स्टैंडर्ड, मिडी और मिनी साइज की होंगी । इसके लिए प्राधिकरण ईओआई पहले ही मांग चुका है। अब तक नौ कंपनियों ने आवेदन किया है।
आवेदन करने की अंतिम तिथि 31 जनवरी से बढ़ाकर सात फरवरी कर दी गई है। इन बसों का संचालन सेक्टर 82 से होगा। यहां पर 25 एकड़ एरिया में बस अड्डा प्रस्तावित है। इसमें से पांच एकड़ एरिया में डिपो बनाकर बसों का संचालन शुरू होगा। अगले दो माह में इसे बनाने का लक्ष्य तय किया गया है।
प्राधिकरण के अनुसार चुनावी अधिसूचना से पहले सिटी बस सेवा के लिए कंपनी का चयन कर लिया जाएगा, ताकि कंपनी अगले तीन-चार माह में नई बसें खरीदकर इसे चला सके।
इस प्रोजेक्ट को देख रहे नोएडा ट्रैफिक सेल के प्रभारी और प्राधिकरण के वरिष्ठ परियोजना अभियंता संदीप चंद्रा ने बताया कि ऑपरेटरों ने चेयरमैन के सामने यह बात भी रखी कि ऑपरेटर को सिटी बस सेवा का जिम्मा मिलने के बाद बसें बनकर आने में तीन से चार माह लग जाएंगे।
इस पर यह निर्णय लिया गया कि जिम्मा मिलने के बाद छह माह तक ऑपरेटर अपनी पुरानी बसों को चला सकेंगे। छह माह बाद इन बसों को हटाकर नई बसें चलानी होंगी। बैठक में यूके की सेरको, नोएडा की स्काई लाइन, दिल्ली की इंद्रप्रस्थ लॉजिस्टिक सेवा आदि कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
सामान्य बसों के बराबर होगा किराया
एसी बसों का किराया भी सामान्य बसों के बराबर होगा। प्राधिकरण का कहना है कि इन बसों को ऑटो-टेंपो के विकल्प के रूप में चलाई जाएगी। ऐसे में एसी बसें होने और किराया कम रखे जाने पर लोग इन बसों को प्राथमिकता देंगे। दूसरी ओर, शहर में इस समय चल रही पीली बसों को बाहर करने का प्लान है। सिटी बस सेवा के तहत प्रस्तावित 100 बसें चलने के बाद इन बसों को हटाया जाएगा।