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अमर सिंह ने कराया चश्मदीद का अपहरण!

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दिल्ली की तीस हजारी अदालत ने कैश फॉर वोट मामले के चश्मदीद गवाह के अपहरण के मामले में दायर शिकायत को खारिज करने संबंधी मजिस्ट्रेट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया।
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अपनी याचिका में हश्मत अली ने अपहरण करने में राज्यसभा सदस्य अमर सिंह व दो अन्य का हाथ बताया था। हश्मत का दावा है कि कैश फॉर वोट मामले में वह चश्मदीद गवाह है।

मामले की सुनवाई के दौरान अमर सिंह और उनके सचिव तरुण अदालत में उपस्थित थे, जबकि तीसरा आरोपी रमेश गैरहाजिर था। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि उसे समन तामिल नहीं हुए।
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'अगवा करके अमर सिंह के घर ले गए'

हश्मत अली के अधिवक्ता ने बताया कि 25 सितंबर 2008 को तरुण व रमेश ने उनके मुवक्किल का खान मार्केट से अपहरण कर लिया था। वे दोनों उसे अमर सिंह के निवास पर ले गए थे।

यह सब इस कारण किया गया कि उनका मुवक्किल संसदीय जांच कमेटी के समक्ष अपना बयान दर्ज न करवा सके।

उन्होंने कहा कि मजिस्ट्रेट ने जनवरी में मात्र इस आधार पर उनके मुवक्किल की शिकायत खारिज कर दी थी कि मामले का कोई निष्पक्ष व स्वतंत्र गवाह नहीं है।
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'खान मार्केट से नहीं हो सकता अपहरण'

दूसरी तरफ अमर सिंह के अधिवक्ता ने कहा कि मजिस्ट्रेट ने हश्मत अली के बयानों का विस्तृत अध्ययन करने के बाद ही फैसला दिया था।

इसके अलावा पुलिस ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि जांच में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला, जिससे साबित हो कि अपहरण हुआ। उन्होंने कहा कि खान मार्केट जैसे स्थान पर अपहरण जैसी संभव ही नहीं है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राज कपूर ने सभी के तर्क सुनने के बाद फैसला 4 अगस्त तक के लिए सुरक्षित रख लिया।
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