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उत्तराखंड के सीएम का प्लॉट बेचने की कोशिश

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गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के पांच अधिकारियों पर इन दिनों कड़ी निगरानी रखी जा रही है। इन अधिकारियों पर उत्तराखंड के सीएम की गाजियाबाद के इंदिरापुरम स्थित प्लॉट को बेचने की साजिश रचने का आरोप है।
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एक अग्रेंजी अखबार के मुताबिक जीडीए के पास इस झूठे सौदे में लिप्त दो सुपरवाइजरों और तीन क्लर्कों के खिलाफ प्रत्यक्ष प्रमाण हैं, जिससे ये साफ जाहिर होता है इन पांचों ने मिलकर हरीश रावत के 350 मीटर के प्लॉट को स्थानीय समाजवादी पार्टी के नेता गुलाब यादव को बेचने की कोशिश कर रहे हैं।

1.20 करोड़ में हुआ था सौदा

जानकारी के अनुसार यह फर्जी डील 1.20 करोड़ रुपए में तय हुई थी जिसमें यादव ने 25 लाख का एडवांस भुगतान कर दिया है। इस सौदे के बारे में यादव को तब शक पैदा हुआ जब ये अधिकारी प्लॉट दिखाने की बात को बार-बार टालते रहे। साथ ही यादव ने जब जमीन के कागजात को अच्छे से देखे, तब उन्हें इस फ्राड का अंदाजा लगा।

यादव बताते हैं क‌ि उक्त पांच जीडीए ‌अधिकारियों ने उनसे 25 लाख रुपए एडवांस के तौर पर लिए थे। जब उन्होंने जोर दिया तब जीडीए अधिकारियों ने प्लॉट दिखाया और जमीन के कागजात की एक कॉपी दी तब जाकर उन्हें पता चला कि ये किसकी जमीन है। यादव ने तब जीडीए में स्पेशल ड्यूटी पर कार्यरत अधिकारी आरपी पांडे के पास शिकायत दर्ज कराई।
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एक सुसाइड नोट में आया था इन पांचों का नाम

पांडे जिन्होंने इस मामले की जांच की है ने कहा कि 'यह प्रत्यक्ष रूप से एक धोखाधड़ी का केस है। यादव का आरोप है कि आरोपी अधिकारियों ने उनसे 25 लाख रुपए एडवांस के रूप में ले लिया और पुलिस में शिकायत करने की धमकी देने पर उन अधिकारियों ने उन्हें आठ लाख रुपए लौटा भी दिए।'

उन्होंने आगे कहा कि वो ये मामला जीडीए के चेयरमैन संतोश यादव के समक्ष रखेंगे और पूछेंगे कि क्या इस मामले में पुलिस केस दर्ज हो या नहीं। जीडीए अधिकारियों ने बताया कि इस मामले के बारे में हरीश रावत को कुछ भी नहीं पता है। जब इस प्लॉट पर जाकर देखा गया तो यहां निर्माण कार्य चल रहा था और मौजूद मजदूरों ने भी इसे रावत का ही प्लॉट बताया।

ध्यान देने वाली बात है कि 2010 में वैशाली में एक आदमी ने अपने घर में जहर खाकर आत्महत्या कर की थी और सुसाइड नोट में उक्त पांचों जीडीए अधिकारियों का नाम लिखा था जो इस जमीन के फर्जी सौदे में संलिप्त पाए गए हैं। उस सुसाइड नोट में भी जमीन से संबंधित फर्जीवाड़ा करके ही लाखों ऐंठने का मामला था।
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