वकीलों के तर्क
सत्येंद्र जैन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन हरिहरन और अधिवक्ता विवेक जैन ने तर्क रखा था कि गवाहों को प्रभावित करने की कोई आशंका नहीं है। उनके भागने का कोई खतरा नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि ईसीआईआर 2017 में दर्ज की गई थी और अभियोजन पक्ष की शिकायत 2022 में दायर की गई थी। तर्क दिया गया कि सीबीआई ने कहा है कि अपराध की आय (पीओसी) 1.27 करोड़ रुपये है। दूसरी ओर, ईडी का कहना है कि यह 4.68 करोड़ रुपये है।
उन्होंने कहा कि ईडी केवल उस हिस्से की जांच कर सकते हैं जिसे सीबीआई अपराध की आय (अनुसूचित अपराध) कहती है। चूंकि ईडी के पास ऐसा करने का अधिकार नहीं है, इसलिए उन्होंने आपके विचार सीबीआई को वापस भेज दिए। अब वे कह रहे हैं कि हम इस पर फिर से विचार करेंगे।
आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि देरी के आधार पर जमानत मांगी जा रही है। ईडी पिछले पांच सालों से इसकी जांच कर रही हैं। आरोप अभी तय नहीं हुए हैं। इस मामले में आगे की जांच लंबित है यह चल रही है।
उन्होंने कहा कि मनीष सिसोदिया 17 महीने तक हिरासत में रहे और उन्हें जमानत मिल गई। के कविता को 5 महीने में जमानत मिल गई। सत्येंद्र जैन 18 महीने से अधिक समय से हिरासत में हैं। 108 गवाह और 5000 पन्नों के दस्तावेज हैं। आरोप अभी तय नहीं हुए हैं। इस मामले में वह लंबे समय से हिरासत में हैं।
ईडी का विरोध
ईडी के विशेष वकील जोहेब हुसैन ने दलीलों का विरोध किया और कहा कि अपराध की आय 4.81 करोड़ रुपये है। उन्होंने देरी पर दलीलें दीं और कहा कि दो सह-आरोपी व्यक्तियों ने कथित तौर पर केवल मुख्य आरोपी की सहायता की। अगर आरोपी सहयोग करते, तो हम मुकदमे के अंतिम चरण में होते।
हुसैन ने तर्क दिया कि मनीष सिसोदिया के मामले में देरी एकमात्र कारण नहीं थी। मुकदमे में देरी, लंबी अवधि तक कारावास। सिसोदिया की ओर से कोई देरी नहीं हुई। यही अंतर है। कोई व्यक्ति स्थगन की मांग नहीं कर सकता और कह सकता है कि मुकदमे में देरी हुई।
जवाबी दलीलों में वरिष्ठ अधिवक्ता हरिहरन ने कहा कि ईडी को यह भी पता नहीं है कि अपराध की आय क्या है। दोनों एजेंसियां अलग-अलग मात्रा का हवाला दे रही हैं। क्या अनुच्छेद 21 सत्येंद्र जैन और सिसोदिया के लिए अलग है? क्या केवल उच्च न्यायालय ही अनुच्छेद 21 पर विचार करेंगे?