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Satyendra Jain: तिहाड़ से बाहर आए सत्येंद्र, मनी लॉन्ड्रिंग केस में मिली थी जमानत, मिलने पहुंचे सिसोदिया-आतिशी

Fri, 18 Oct 2024 09:01 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जैन को ईडी ने 30 मई 2022 को उनसे कथित तौर पर जुड़ी चार कंपनियों के जरिए धन शोधन के आरोप में गिरफ्तार किया था।
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तिहाड़ से बाहर आए सत्येंद्र जैन - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जेल में बंद दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन शुक्रवार रात तिहाड़ जेल नंबर सात से बाहर निकल गए। राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें इस मामले में जमानत दे दी है। सत्येंद्र जैन को अदालत से जमानत मिलने की सूचना मिलते ही उनके समर्थक तिहाड़ जेल के सामने जुटने लगे थे। सभी अपने नेता के बाहर निकलने का इंतजार करते हुए ढोल नगाड़ा बजाते हुए इसपर थिरकते हुए दिखे। साथ ही वह आपस में मुंह मीठा कर रहे थे। 

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इस बीच अदालत का आदेश जेल प्रशासन को मिला। उसके बाद जेल प्रशासन ने कागजी कार्रवाई शुरू कर दी। करीब आठ बजे दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी, मनीष सिसोदिया और सांसद संजय सिंह एक ही कार में सवार होकर तिहाड़ जेल के गेट पर पहुंचे। अपने नेताओं को देखकर समर्थकों में जोश आ गया। समर्थकों ने वहां जमकर नारेबाजी शुरू कर दी। इससे पहले ही पश्चिम जिला पुलिस जेल के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर दिए थे। भारी संख्या में पुलिस बल को मौके पर तैनात किया गया था। पुलिस ने जेल के गेट पर बैरिकेडिंग कर रखी थी।

रात करीब सवा आठ बजे सत्येंद्र जैन जेल से बाहर निकले। दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी, मनीष सिसोदिया और सांसद संजय सिंह ने उनका जोरदार स्वागत किया। इसी बीच सिसोदिया ने जैन को गले से लगा लिया।
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वकीलों के तर्क
सत्येंद्र जैन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन हरिहरन और अधिवक्ता विवेक जैन ने तर्क रखा था कि गवाहों को प्रभावित करने की कोई आशंका नहीं है। उनके भागने का कोई खतरा नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि ईसीआईआर 2017 में दर्ज की गई थी और अभियोजन पक्ष की शिकायत 2022 में दायर की गई थी। तर्क दिया गया कि सीबीआई ने कहा है कि अपराध की आय (पीओसी) 1.27 करोड़ रुपये है। दूसरी ओर, ईडी का कहना है कि यह 4.68 करोड़ रुपये है।

उन्होंने कहा कि ईडी केवल उस हिस्से की जांच कर सकते हैं जिसे सीबीआई अपराध की आय (अनुसूचित अपराध) कहती है। चूंकि ईडी के पास ऐसा करने का अधिकार नहीं है, इसलिए उन्होंने आपके विचार सीबीआई को वापस भेज दिए। अब वे कह रहे हैं कि हम इस पर फिर से विचार करेंगे।

आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि देरी के आधार पर जमानत मांगी जा रही है। ईडी पिछले पांच सालों से इसकी जांच कर रही हैं। आरोप अभी तय नहीं हुए हैं। इस मामले में आगे की जांच लंबित है यह चल रही है।

उन्होंने कहा कि मनीष सिसोदिया 17 महीने तक हिरासत में रहे और उन्हें जमानत मिल गई। के कविता को 5 महीने में जमानत मिल गई। सत्येंद्र जैन 18 महीने से अधिक समय से हिरासत में हैं। 108 गवाह और 5000 पन्नों के दस्तावेज हैं। आरोप अभी तय नहीं हुए हैं। इस मामले में वह लंबे समय से हिरासत में हैं।
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ईडी का विरोध
ईडी के विशेष वकील जोहेब हुसैन ने दलीलों का विरोध किया और कहा कि अपराध की आय 4.81 करोड़ रुपये है। उन्होंने देरी पर दलीलें दीं और कहा कि दो सह-आरोपी व्यक्तियों ने कथित तौर पर केवल मुख्य आरोपी की सहायता की। अगर आरोपी सहयोग करते, तो हम मुकदमे के अंतिम चरण में होते।

हुसैन ने तर्क दिया कि मनीष सिसोदिया के मामले में देरी एकमात्र कारण नहीं थी। मुकदमे में देरी, लंबी अवधि तक कारावास। सिसोदिया की ओर से कोई देरी नहीं हुई। यही अंतर है। कोई व्यक्ति स्थगन की मांग नहीं कर सकता और कह सकता है कि मुकदमे में देरी हुई।

जवाबी दलीलों में वरिष्ठ अधिवक्ता हरिहरन ने कहा कि ईडी को यह भी पता नहीं है कि अपराध की आय क्या है। दोनों एजेंसियां अलग-अलग मात्रा का हवाला दे रही हैं। क्या अनुच्छेद 21 सत्येंद्र जैन और सिसोदिया के लिए अलग है? क्या केवल उच्च न्यायालय ही अनुच्छेद 21 पर विचार करेंगे?
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