आम आदमी पार्टी (आप) धरना-प्रदर्शन से तौबा कर राजधानी में जनाधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इसकी कमान पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल के हाथ में है।
केजरीवाल रोजाना दो-तीन नुक्कड़ सभाएं कर रहे हैं। गूगल हैंगहाउट पर भी उनकी लोगों व पार्टी कार्यकर्ताओं से बात हो रही है। पार्टी की रणनीति है कि मौजूदा सियासी शोरगुल में हंगामा करने की जगह जमीनी स्तर पर काम किया जाए।
यह बदलाव लोकसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार के बाद देखने को मिला है।
शाजिया ने खोल दीं केजरीवाल की आंखें?
दरअसल, पार्टी छोड़ते समय वरिष्ठ नेता शाजिया इल्मी ने आरोप लगाया था कि केजरीवाल चंद नेताओं से घिर गए हैं। एक बैठक में कई कार्यकर्ताओं ने भी इसी तरह के आरोप लगाए थे।
इसको देखते हुए वरिष्ठ नेताओं की बैठक में तय किया गया कि पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की जरूरत है। इसकी जिम्मेदारी केजरीवाल पर डाली गई।
सूत्रों के अनुसार, केजरीवाल रोजाना शाम को दो-तीन जगहों पर नुक्कड़ सभाएं कर रहे हैं। भाषणबाजी की जगह उनकी कोशिश लोगों की बात सुनने और उनका जवाब देने की होती है। साथ ही केजरीवाल दो बार सात-सात विधानसभाओं में गूगल हैंगआउट के जरिए पहुंचे।
'लोकतंत्र के लिए खतरा हैं अमित शाह'
पार्टी प्रवक्ता दिलीप पांडेय के मुताबिक, अरविंद केजरीवाल रोजाना सभाएं कर रहे हैं। उनकी कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक अपनी बात पहुंचाई जाए।
पार्टी रणनीतिकारों का मानना है कि नई-नई केंद्र सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरना नासमझी होगी। माना जा रहा है कि इस समय के आंदोलन आम लोगों पर प्रभाव नहीं डाल सकेंगे। लोगों में इसका संदेश यही जाएगा कि पार्टी सिर्फ विरोध के लिए सड़क पर उतर रही है।
AAP ने अमित शाह को भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने के फैसले को भारतीय लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक बताया है। अमित शाह पर ढेरों मामले लंबित हैं। इनमें हत्या व अपहरण जैसे संगीन मामले भी शामिल हैं। अमित शाह के भाजपा अध्यक्ष बनने से इन मामलों के प्रभावित होने की आशंका बनती है।