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AAP की रैली से टेंशन में आईं भाजपा-कांग्रेस

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आम आदमी पार्टी की रैली से दिल्ली प्रदेश भाजपा और कांग्रेस दोनों ही चिंतित हो गई हैं। रैली में जुटी भीड़ के बारे में दोनों ही दलों के नेता भले ही यह कह रहे कि दिल्ली की आबादी के हिसाब से लोगों की संख्या काफी कम थी। लेकिन पार्टी के नेता सुबह से शाम तक रैली स्थल पर जुटी भीड़ की जानकारी लेने में जुटे रहे।
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भाजपा के कई कार्यकर्ता रैली स्थल पर पहुंचकर भीड़ की नब्ज टटोलते दिखे। यही नहीं राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पदाधिकारी भी भाजपा कार्यकर्ताओं से रैली का जायजा लेते रहे।

वहीं भाजपा नेता वाट्स एप, मोबाइल, फेसबुक, न्यूज चैनलों पर आने वाली खबरों से भीड़ का अंदाजा लगने में जुटे थे।
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BJP पर उलटा पड़ सकता है ये फैसला

रैली के बाद भाजपा में जोड़तोड़ कर सरकार बनाने की राय देने वाले धड़े को काफी बल मिला है। दरअसल लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा नेता यह समझ रहे थे कि आम आदमी पार्टी दिल्ली में जनाधार खो चुकी है। लेकिन जंतर-मंतर की रैली के बाद अब भाजपा नेताओं में लगने लगा है कि ‘आप’ का वजूद दिल्ली में कायम है।

प्रदेश भाजपा का एक धड़ा फिर सरकार बनाने के लिए आलाकमान तक यह संदेश पहुंचाने में जुटा है कि अगर दिल्ली में चुनाव होते हैं तो ‘आप’ एक बार फिर से बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी।

क्योंकि झुग्गी, अनाधिकृत/अधिकृत कॉलोनी, पुर्नवास कॉलोनी में आम आदमी पार्टी की पकड़ ढीली नहीं हुई है। ऐसे में चुनाव में जाने का फैसला उलटा पड़ सकता है।
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'उपराज्यपाल का मोदीकरण' कहना गलत

उधर, भाजपा का दूसरा धड़ा अभी भी चुनाव के पक्ष में है। भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी, प्रदेश महामंत्री शिखा राय, जयप्रकाश जेपी समेत कई नेताओं का कहना है कि दिल्ली की कुल आबादी में से तीन-चार हजार लोगों को एकत्र कर लेने को जन आंदोलन नहीं कहा जा सकता।

अगर दिल्ली विधानसभा चुनाव होता है तो पार्टियों को अपनी ताकत का अंदाजा लग जाएगा।

प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा सतीश उपाध्याय ने कहा कि दिल्ली के उपराज्यपाल का मोदीकरण हो जाने और दिल्ली सरकार के अधिकारियों को सत्ता में आकर उन्हें देख लेने की बात कहना आम आदमी पार्टी की ओछी मानसिकता का प्रतीक है। प्रचार पर लाखों रुपये खर्च करके भी आम आदमी पार्टी महज 3000-3500 लोगों की ही भीड़ ही जंतर-मंतर पर जुटा पाई।
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