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केजरीवाल पर आरोप, कर रहे हैं राजनीतिक ड्रामा

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आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बेशक नैतिक आधार पर जेल जाना स्वीकार किया, लेकिन सियासी हलके में माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव की हार से बने दबाव से ध्यान हटाने की रणनीति का हिस्सा है।
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माना जा रहा है कि इससे सवालों के कटघरे से निकलने में कामयाबी मिलेगी। साथ ही पार्टी के हक में सहानुभूति भी पैदा हो सकती है।

पार्टी का यह भी कहना है कि इसी तरह के दो मामलों में पहले केजरीवाल को जमानत मिल चुकी है, लेकिन इस मामले में अदालत ने जेल भेज दिया।

चित हो गए AAP के दिग्‍गज!

दिल्ली में सरकार बनाने के बाद आम आदमी पार्टी को मिले बेहतर रिस्पांस से उत्साहित पार्टी ने बगैर ठोस सांगठनिक आधार के लोकसभा में 434 उम्मीदवार उतार दिए।

जबकि शुरुआत में दिल्ली-एनसीआर के साथ हरियाणा, पंजाब जैसे छोटे राज्यों में पार्टी का विस्तार करने की बात हुई थी और सौ उम्मीदवार उतारने का निर्णय लिया गया था।

चुनाव के परिणाम रणनीतिकारों की उम्मीदों के उलट रहे। पार्टी के वरिष्ठ नेता भी चित हो गए। राष्ट्रीय पार्टी बनने भर का भी वोट ‘आप’ को नहीं मिल सका। इससे कार्यकर्ता खासे निराश हैं।
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केजरी का पॉलिटिकल ड्रामा

वहीं, दिल्ली के विधायकों ने भी राजधानी में दुबारा सरकार बनाने का दबाव बना रखा था। 16 मई के बाद से पार्टी पूरी तरह दुविधा में दिख रही है।

पहले दिल्ली में सरकार बनाने की बात को सिरे से नकार दिया, लेकिन मंगलवार को केजरीवाल ने एलजी से मुलाकात कर सरकार बनाने को जनमत संग्रह कराने की बात कही।

बुधवार को पार्टी ने फिर पलटी खाई और सरकार बनाने की सारी संभावना को इंकार कर दिया। केजरीवाल की इस चाल से जानकार मानते हैं कि चुनावी हार से बने दबाव को कम करने की रणनीति है। हालांकि विपक्ष इसे राजनीतिक ड्रामा करार दे रहा है।
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