लॉकडाउन के दौरान जिन कर्मचारियों ने घर से काम करना शुरू किया था, उनमें से 74 फीसदी अब भी वर्क फ्रॉम होम जारी रखना चाहते हैं। इसके पीछे सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में उनका विश्वास नहीं होना बताया जा रहा है। यह खुलासा एसोचैम-प्राइमस पार्टनर्स के सर्वे में हुआ है।
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बंगलूरू, हैदराबाद, पुणे तथा अहमदाबाद में कई कर्मचारियों से सर्वे में ये बातें सामने आई हैं। अधिकतर कर्मचारी दफ्तर जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन के बजाय अपने निजी वाहन प्रयोग करने के पक्षधर हैं। इसके पीछे ये लोग सार्वजनिक वाहनों में संक्रमण के खतरे को मान रहे हैं।
हालांकि इससे कंपनियों को कार्यालय के किराए समेत अन्य संचालन लागतों को कम करने में मदद मिलेगी। इस संबंध में एसोचैम के सचिव दीपक सूद का कहना है कि निर्माण से लेकर सामान तथा सेवाओं की डिलीवरी में न्यू नार्मल नए रूप में सामने आ रहा है। तकनीक ने वर्क फ्रॉम होम को व्यावहारिक तथा फायदेमंद विकल्प बना दिया है।
सर्वे में कई आईटी फर्म का उदाहरण दिया गया है, जिसमें इंदौर, भोपाल, जबलपुर, विजयवाड़ा, चंडीगढ़, पटना तथा नासिक जैसे टीयर-टू शहरों के 112 नए कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम ही करना चाहते हैं। इससे इन शहरों में ही काम के अधिक अवसर मिलेंगे और महानगरों पर जनसंख्या का दबाव कम होगा। सर्वे के अनुसार 73 फीसदी कर्मचारी दफ्तर जाने के लिए सार्वजनिक वाहनों के बजाय अपने निजी वाहनों का प्रयोग करने के ज्यादा इच्छुक हैं।
केवल 21 फीसदी कर्मचारी ही सार्वजनिक परिवहन के प्रयोग के पक्ष में हैं। जुलाई में 197523 कारों की बिक्री को कर्मचारियों के इस रुझान से जोड़कर देखा जा रहा है।
हालांकि जानकार इसका दूसरा पहलू भी देख रहे हैं। उनका मानना है कि निजी वाहनों की संख्या बढ़ने से बड़े शहरों में जाम की समस्या बढ़ेगी। इसलिए कॉरपोरेट तथा सरकारी एजेंसियों को कर्मचारियों के साथ मिलकर एक व्यावहारिक समाधान तलाशने की जरूरत है। काम के घंटों में परिवर्तन इसका एक समाधान हो सकता है।
सर्वे में यह भी कहा गया है कि सरकारों को शहरी डिजाइन परिवर्तन पर विचार करना चाहिए जिससे पैदल यात्रा तथा गैर मोटर चालित वाहनों के प्रयोग को बढ़ावा मिले। इससे शहरों में जाम कम करनेे में काफी मदद मिलेगी। इसके अलावा परिवहन एजेंसियों को यात्रा को सुरक्षित बनाने पर खास देने की जरूरत है। उन्हें सुनिश्चित करना होगा कि परिवहन व्यवस्था की अग्रिम पंक्ति में काम करने वाले चालक तथा परिचालक हर समय कोरोना से बचाव के लिए मास्क, दस्ताने तथा फेस शील्ड का इस्तेमाल करें।
बड़ी संख्या में शहरी कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम, लचीले तथा परिवर्तित कार्य काल के पक्ष में हैं। इससे शहरों की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन आएगा। यात्रियों के विश्वास को दोबारा जगाने के लिए सार्वजनिक परिवहन संचालकों को कड़े कोरोना सुरक्षा मानकों तथा तकनीकी बदलाव को अपनाना होगा। इसे यात्रियों की कम संख्या तथा सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों के बाद भी अपनाना होगा।
- निलय वर्मा, सीईओ तथा सह संस्थापक, प्राइमस पार्टनर्स
महामारी ने उद्योगों में भारी परिवर्तन लाकर उन्हें तकनीकी माध्यमों को अपनाने के लिए प्रेरित किया है और परिवहन व्यवस्था भी इससे अलग नहीं है। इस समय सार्वजनिक परिवहन संचालकों तथा सरकारी एजेंसियों के पास फिलहाल यात्रियों का भरोसा बढ़ाने के लिए ई-टिकटिंग तथा डिजिटल पेमेंट माध्यम अपनाने का अवसर है। इससे भविष्य मेें डिजिटल इंडिया की सोच को भी बढ़ावा मिलेगा।
-देवरूप धर, प्रबंध निदेशक तथा सह-संस्थापक, प्राइमस पार्टनर्स