आजादी के इन 70 सालों में गुड़गांव देखते ही देखते विकास के उस शिखर पर विराजमान हो गया जो देश के अन्य शहरों के लिए किसी मिसाल से कम नहीं है। यह शहर आधुनिकता, विकास और अपनी चमक दमक से दुनिया के खास शहरों में शुमार हो गया है। यहां 250 फाच्र्यून-500 कंपनियां हैं। यहीं पर देश का सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल हब है। यहां वह सब कुछ मौजूद जो किसी भी शहर को वैश्विक बनाने के लिए जरूरी है। मगर यहां कुछ चीजें ऐसी भी हैं जो शहर की शान को बट्टा लगाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही हैं। आइए हम चर्चा करते हैं उन परेशानियों की-
ट्रैफिक जाम गुड़गांव को दुनियाभर में कर रहा बदनाम
गुड़गांव। अगर किसी राह चलते व्यक्ति से पूछा जाए कि गुड़गांव में आजकल सबसे बड़ी समस्या क्या है। नि:संदेह वह ट्रैफिक जाम का नाम लेगा। इससे आम से लेकर खास तक काफी परेशान हैं। आलम यह है कि जाम के कारण गुड़गां का नाम देश ही नहीं दुनिया भर में बदनाम हो रहा है। लोगों का मानना है कि खराब यातायात प्रबंधन और अनियोजित विकास इसका सबसे बड़ा कारण है। पिछले दिनों के महाजाम ने गुड़गांव की जो भयानक तस्वीर पेश की उसने आईटी-बीपीएम, कॉरपोरेट और इंडस्ट्री तक के विश्वास को हिला कर रख दिया था। आने वाले दिनों में भी इस प्रकार के जाम के लगने से इनकार नहीं किया जा सकता।
गुड़गांव में बुनियादी सुविधा का भारी अभाव हैं। यहां की सड़के वाहनों के दबाव के हिसाब से काफी पतली हैं। शहर की करीब मुख्य सड़कों की चौड़ाई को एक सीमा से अधिक बढ़ाया नहीं जा सकता। इस कारण जाम की समस्या को दूर करने के लिए ट्रैफिक पुलिस को ठोस यातायात प्रबंधन करना होगा। जो अभी कहीं नहीं दिखता है। अधिकतर चौक-चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी नहीं होती। अक्सर ट्रैफिक होमगार्ड और निजी कंपनियों के गार्डों के भरोसे छोड़ दिया जाता है। जिससे दिनों दिन संकट बढ़ता जा रहा है। हल्की बारिश के बाद दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेस-वे, सर्विस लेन और शहर के आंतरिक भागों में भारी जाम लगने लगता है। बारिश की बात तो दूर आम दिनों में भी यहां के लोगों को जाम से जूझना पड़ रहा है। हरियाणा इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के चेयरमैन किशन कपूर का कहना है कि जाम ने पूरे गुड़गांव को बदनाम कर दिया है। अगर इससे निपटने का ठोस इंतजाम सरकार और प्रशासन ने नहीं किया तो उद्योगों से लेेकर कॉरपोरेट कंपनियों तक को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।
शहरभर में अतिक्रमण की बाढ़
साइबर सिटी में अतिक्रमण का बोलबाला है। अतिक्रमण खत्म करने में नगर निगम, हुडा और एचएसआईआईडीसी लगातार नाकाम हो रहे हैं। इनके द्वारा जाम हटाने की कार्रवाई महज औपचारिकता ही साबित हो रही है। शहर की शायद ही कोई सड़क हो जो अतिक्रमण से मुक्त हो। वरना न्यू और ओल्ड रेलवे स्टेशन रोड, सेक्टर-4, सेक्टर-15, सेक्टर-15, महरौली रोड, ओल्ड दिल्ली रोड, गोल्फ कोर्स रोड लेकर डीएलएफ के क्षेत्रों में भी इसकी बाढ़ है। शहर के सदर बाजार में अतिक्रमण इतना भयानक है कि वाहन से जाना तो दूर पैदल चलना भी दुश्वार है। शहरवासियों का कहना है कि गुड़गांव में अतिक्रमण एक बहुत बड़ा कारोबार है। रेहड़ी से लेकर फेरी तक से पैसा लेकर उन्हें अतिक्रमण करने की इजाजत दी जाती है। नगर निगम रोजाना अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर रहा है मगर इसका कोई असर दिखाई नहीं देता है।
शहर के बारे में लोगों की राय...
ट्रैफिक जाम गुड़गांव का सबसे बड़ा बैक ड्रॉ है। अगर यह समस्या नहीं हो तो गुड़गांव एक शानदार शहर है। पीकआवर में यहां की सड़कों पर जाम का जो नजारा दिखता है उससे दिल दहल जाता है। दूसरी चीज यहां लोगों में ट्रैफिक सेंस का भी भारी अभाव है। उन्हें अधिक से अधिक जागरूक करने की जरूरत है। यहां लेन ड्राइविंग की कोई व्यवस्था नहीं है इससे भी संकट बढ़ता जा रहा है।-रामिल बंसल
निश्चित रूप से गुड़गांव में जाम बड़ी समस्या है। इससे निपटने के लिए ठोस इंतजाम की जरूरत है। यह तभी संभव है जब सरकारी विभागों में आपसी लालमेल हो। आएदिन यहां कहीं न कहीं जाम लगता रहता है। यही कारण है कि गुड़गांव में लोग आने से कतराते हैं। औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले जाम के कारण अक्सर देरी से काम पर पहुंच पाते हैं।-मनोज मोकलवास
गुड़गांव की सड़कों पर अतिक्रमण और जाम दो ऐसी समस्याएं हैं जिनका समाधान काफी मुश्किल दिखाई दे रहा। पिछले दिनों महाजाम ने जिस प्रकार से गुड़गांव और दिल्ली-एनसीआर में लोगों को परेशान किया था वह काफी चिंताजनक है। भविष्य में ऐसी भयावह स्थिति नहीं बने इसके लिए काफी कुछ करने की जरूरत है। इसी प्रकार से अतिक्रमण पर भी सख्ती की दरकार है।-सुनील पंवार
गुड़गांव को बेहतर शहर बनाने के लिए सरकार को विदेशी निवेश लाने से पहले बुनियादी सुविधा दुरुस्त करने की जरूरत है। अगर ऐसा नहीं होगा तो स्थिति और खराब होने से कोई नहीं रोक सकता है।-डॉ.अशोक दिवाकर