17 अप्रैल 1976 को नोएडा की स्थापना औद्योगिक शहर के रूप में हुई। शुरुआत के दो दशकों में उद्योगों के लगने पर जोर रहा। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग बड़े पैमाने पर आए। सेक्टर-1 से 11 तक नोएडा का पहला फेज ऐसे उद्योगों से गुलजार हुआ।
विज्ञापन
कई बड़े उद्योग भी लगे। नोएडा फेज दो व तीन में मल्टीनेशनल कंपनियां आईं। उद्योग के साथ ही रिहायश, दुकानें और शिक्षण संस्थान भी खुले। वर्ष 2000 से पहले तक नोएडा की पहचान बड़े औद्योगिक शहर के रूप में होने लगी। युवाओं को रोजगार और प्रदेश सरकार को भारी-भरकम राजस्व मिलने लगा।
इसके बाद नोएडा का झुकाव उद्योग के बजाय रिहायश की तरफ बढ़ा। 2002 से 2012 के बीच नोएडा में उद्योग तो नाममात्र के लगे, लेकिन ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट की बाढ़ सी आ गई।
विज्ञापन
खासतौर पर 2009 से 2012 के बीच नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे, नोएडा फेज तीन, ग्रेटर नोएडा वेस्ट और ग्रेटर नोएडा की पहचान सिर्फ रिहायश बनकर रह गई।
अब उद्योगों की रफ्तार थमने लगी है। रोजगार भी कम होने लगे हैं। नोएडा की आमदनी का मुख्य जरिया जमीन का आवंटन भी खत्म होने की कगार पर है। आने वाले समय में नोएडा के सामने अपनी विश्वस्तरीय शहर की पहचान बनाए रखने की चुनौती भी है।
नोएडा शहर की 10 खास बातें
1. दिल्ली से बाहर पहली मेट्रो
अत्याधुनिक परिवहन की पहचान वाली दिल्ली मेट्रो ने पहली बार राजधानी से बाहर नोएडा में कदम रखा। सिटी सेंटर से द्वारका के बीच मेट्रो का सफर 2009 में शुरू हुआ। यह अब भी सबसे अधिक यात्रियों को सफर कराने वाले रूटों में से एक है।
2. ओखला पक्षी विहार
यमुना नदी के किनारे ओखला पक्षी विहार पक्षी प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। देशी-विदेशी पक्षी इसमें समय-सयम पर अपना बसेरा बनाते हैं।
3. दलित प्रेरणा स्थल
राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल का लोकार्पण करीब चार साल पहले हुआ। इस स्मारक में कई महापुरुषों की मूर्तियां लगाई गई हैं। कई हाथियों की प्रतिमाएं भी लगी हैं। नोएडा का सबसे ऊंचा फाउंटेन इसी स्मारक में है। सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहा है।
4. विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधा है यहां
नोएडा ने चिकित्सा के क्षेत्र में बड़ा मुकाम हासिल किया है। कैलाश, फोर्टिस, अपोलो, जेपी समेत कई बड़े अस्पताल यहां हैं। छोटे अस्पताल और नर्सिंग होम को भी मिला लें तो यह संख्या 100 के पार पहुंच जाएगी। मल्टी स्पेशियलिटी सरकारी अस्पताल भी चालू होने वाला है।
5. कई बड़े शिक्षण संस्थान हैं यहां
नोएडा ने शिक्षा के क्षेत्र में भी ऊंची पहचान बनाई है। करीब 50 बड़े शिक्षण संस्थान यहां चल रहे हैं, जिनमें देश भर से छात्र-छात्राएं यहां शिक्षा लेने आते हैं।
6. नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे
नोएडा से ग्रेटर नोएडा को जोड़ने के लिए एक्सप्रेसवे भी यहां की पहचान बन चुका है। इस एक्सप्रेसवे के कारण ही दोनों शहरों के बीच की करीब 30 किलोमीटर की दूरी 30 मिनट में ही तय हो जाती है। कॉमनवेल्थ गेम के दौरान यहां साइकिल रेस भी हुई थी।
7. डीएनडी मार्ग
नोएडा और दिल्ली को जोड़ने के लिए यमुना नदी पर बना डीएनडी मार्ग अपने टोल को लेकर भले ही विवादों में रहता है, लेकिन दोनों शहरों के बीच रोजाना सफर करने वाले सवा लाख वाहनों की जरूरत बन चुका है।
8. देश की सबसे बड़ी डील नोएडा के नाम
देश की सबसे बड़ी लैंड डील भी नोएडा के नाम है। सिटी सेंटर के नाम से मिक्सलैंड यूज वाले दो सेक्टर वेब कंपनी ने खरीदे। किसी एक प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री से सबसे ज्यादा स्टांप की प्राप्ति भी इसी प्रोजेक्ट के नाम दर्ज है।
9. उत्तर भारत की सबसे ऊंची बिल्डिंग
उत्तर भारत की सबसे ऊंची बिल्डिंग सुपरनोवा सेक्टर-94 में बन रही है। 80 मंजिल की इस इमारत में घर, मॉल, ऑफिस, हैलीपेड सब कुछ एक ही छत के नीचे है। इसकी पहचान पिकनिक स्पॉट के रूप में भी होगी। इस इमारत से यमुना नदी के किनारे का नजारा दिखेगा।
10. टकसाल भी है यहां
भारतीय टकसाल नोएडा के सेक्टर-1 में स्थित है। यहां सिक्कों की ढलाई होती है। बीते दिनों इसकी सुरक्षा पर आईबी की रिपोर्ट के बाद यह काफी चर्चा में आया है।
शहर की पांच खामियां
1. शहर के ट्रैफिक की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। वाहन चालक खुद से ट्रैफिक नियमों का पालन करने को तैयार नहीं हैं।
2. शहर की परिवहन व्यवस्था भी लचर बनी हुई है। शहर की जर्जर बसों और टेपों में धक्के खाने को लोग विवश हो रहे हैं।
3. अतिक्रमण भी इस शहर के लिए बड़ी मुसीबत है। सरकारी जमीन से लेकर सड़कों तक कब्जा करने वालों ने शहर की शक्ल बिगाड़ रखी है।
4. बिजली संकट भी शहर की बड़ी समस्या है। 24 घंटे बिजली आपूर्ति के दावे हर बार फेल रहे। गर्मियों में 4-5 घंटे की बिजली कटौती आम बात है।
5. सड़कों के किनारे पार्किंग ने शहर की यातायात व्यवस्था को चौपट कर रखा है। रिहायश हो या उद्योग, सभी एरिया में वाहन सड़कों पर ही खड़े किए जाते हैं।
पांच उम्मीदें
1. मेट्रो : नोएडा के तीन मेट्रो रूटों सिटी सेंटर से सेक्टर-62, बॉटेनिक गार्डन से कालिंदी कुंज और नोएडा से ग्रेटर नोएडा मेट्रो पर काम चल रहा है। ये सभी परियोजनाएं दो साल के भीतर पूरी हो जाएंगी।
2. सिटी बस सर्विस: नोएडा-ग्रेटर नोएडा के बीच सिटी बसें जून से चलने लगेंगी। ये सभी वातानुकूलित होंगी। दोनों शहरों में कई एरिया ऐसे हैं, जिनमें निजी वाहनों के अलावा कोई विकल्प नहीं है। वहां की समस्या खत्म हो जाएगी।
3. एलिवेटेड रोड व अंडरपास: शॉपिक्स मॉल से विश्व भारती स्कूल तक एलिवेटेड रोड पर तेजी से काम चल रहा है। करीब एक साल में यह प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा। सेक्टर-62, 61 व एनटीपीसी चौराहे पर काम चल रहा है। इससे ट्रैफिक के हालात सुधरेंगे।
4. सिटी सर्विलांस: शहर की सुरक्षा व्यवस्था चौकस करने के लिए सिटी सर्विलांस परियोजना पर काम चल रहा है। इस प्रोजेक्ट के तहत नोएडा के प्रमुख चौराहों पर सीसीटीवी लगेंगे, जिससे यातायात और सुरक्षा व्यवस्था में मदद मिलेगी।
5. यमुना पर तीन पुल: ओखला के समानांतर यमुना नदी पर बन रहा पुल इसी साल चालू हो जाएगा, जिससे दिल्ली की तरफ आने-जाने वालों को सहूलियत मिलेगी। वहीं, एफएनजी रोड के जरिये नोएडा को फरीदाबाद से जोड़ते हुए यमुना नदी पर प्रस्तावित दो पुलों से दोनों शहरों के बीच की दूरी आधी से भी कम हो जाएगी।