जवाहरलाल नेहरू कैंपस में बृहस्पतिवार देर रात बाइक के पेड़ से टकराने पर तीन छात्रों की मौत हो गई थी। लेकिन असल में मामला कुछ और ही है।
जेएनयू में सड़क हादसे का शिकार हुए छात्रों को रफ्तार सीमा लिखे बोर्ड की अनदेखी महंगी पड़ गई।
जिस बाहरी रिंग रोड पर छात्र बाइक्स को 80 से 100 किलोमीटर प्रतिघंटे की ज्यादा रफ्तार से दौड़ा रहे थे, उस पर 25 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से वाहन चलाने की हिदायत वाला बोर्ड लगा था।
कोरियन भाषा सीखते थे छात्र
एक दर्दनाक हादसे में मरने वाले तीनों छात्र जेएनयू में कोरियन लैंग्वेज के स्टूडेंट थे। इनमें से दो छात्र रवि चौधरी, रविशंकर गुप्ता बिहार के गया जिले के थे। एक छात्र संतोष कुमार झारखंड की राजधानी रांची का था।
कैंपस में जगह-जगह दुर्घटना संभावित क्षेत्र, तीव्र मोड़ और अंधा मोड़ लिखे बोर्ड भी लगे हैं। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि दो बाइक पर सवार पांच छात्र चीखते-चिल्लाते हुए रेस लगा रहे थे।
छात्रों की मौत से पूरे कैंपस में उदासी का माहौल बना छा गया है। घटना के बाद कॉलेज प्रशासन ने छात्रों के परिवारवालों को घटना की जानकरी दे दी है।
अस्पताल ले जाते समय हुई मौत
पुलिस अधिकारियों के अनुसार पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों ने बताया कि तीनों छात्रों की मौत सिर पर गंभीर चोट लगने से हुई। जो छात्र पेड़ से टकराया था, उसका सिर का अंदरूनी हिस्सा बाहर आ गया था। बाकी दो छात्रों का सिर सड़क से टकराया था।
तीनों ने अस्पताल ले जाते हुए रास्ते में ही दम तोड़ दिया था। पूछताछ करने पर जेएनयू के नर्सरी टी प्वाइंट पर तैनात गार्ड ने बताया है कि बाइक दो थीं। एक बाइक पर तीन, जबकि दूसरीपर दो लोग सवार थे।
जेएनयू की सुरक्षा में तैनात गार्डों को बाइक सवार छात्रों को रोकने के लिए समय ही नहीं मिल पाया, इससे पहले ही हादसा हो गया। शुक्रवार शाम तक दूसरी बाइक पर सवार छात्रों की पहचान नहीं हो पाई थी। पुलिस का कहना है कि जेएनयू के छात्र पूछताछ में सहयोग नहीं हर रहे हैं।