मेवात के लोगों का मुख्य काम खेती और पशुपालन है। इसके बावजूद पशु चिकित्सा केंद्र में संसाधनों की भारी कमी है। जिले में 23 पशु चिकित्सकों के पद स्वीकृत है, लेकिन केवल 7 चिकित्सक ही यहां मौजूद हैं। इतना ही नहीं जिला मुख्यालय पर बैठने वाले उपनिदेशक का पद भी लंबे समय से रिक्त पड़ा हुआ है। इसके अलावा अन्य स्टाफ, अस्पताल इमारत, कार्यालय आदि के नाम पर असुविधाएं हैं। जिसके चलते पशुपालकों को झोलाछाप पशु चिकित्सकों के हाथों अपनी जेब कटवाने पर मजबूर होना पड़ता है।
वर्ष 2005 में मेवात जिला बनने के बाद पशु चिकित्सा विभाग में जिला स्तर पर उपनिदेशक का पद सृजित किया गया। लेकिन तभी से यह पद अधिकांश समय रिक्त ही रहा है। पशु चिकित्सा विभाग के मुताबिक जिले में 448 गांव है। जिनमें केवल 22 पशु अस्पताल खुले हुए हैं। एक अस्पताल के जिम्मे 20 से अधिक गांव आते हैं।
जिला मुख्यालय पर एक लैब भी बनाई हुई है। एक पशु अस्पताल पर एक पशु चिकित्सक की तैनाती आवश्यक है और एक चिकित्सक लैब में अनिवार्य है। इस प्रकार जिले में कुल 23 पशु चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं। लेकिन सात चिकित्सक ही यहां तैनात हैं।
इसके अलावा जिले में 61 पशु चिकित्सा डिस्पेंसरी भी खोली हुई हैं। जिन पर एक वैटेनरी लाइवस्टोक डेवलपमेंट असिस्टेंट (वीएलडीए)तैनात होता है। लेकिन यहां 27 वीएलडीए के पद रिक्त हैं।
जिला मुख्यालय नूंह में उपनिदेशक कार्यालय की इमारत भी जर्जर हो चुकी है। जिसे पीडब्ल्यूडी बीएंड आर विभाग कंडम घोषित कर चुका है और नई इमारत के लिए 83 लाख रुपए का एस्टीमेट बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजा हुआ है। डॉक्टरों व सुविधाओं की कमी को लेकर कई बार उच्चाधिकारियों को लिखा जा चुका है, उम्मीद है कि जल्द कुछ समस्याओं का समाधान होगा।
- डॉ. नरेंद्र, कार्यकारी उप निदेशक नूंह