लंबे इंतजार के बाद शुरू हुए दिलशाद गार्डन से नया बस अड्डा मेट्रो प्रोजेक्ट से जुड़े मामले पर शहरवासियों के साथ ही जीडीए अधिकारी नजर बनाए हुए हैं।
जीडीए अधिकारियों को प्रोजेक्ट में देरी होने से इसकी लागत बढ़ने की आशंका सता रही है। जीडीए पहले ही दो बार बढ़ी लागत के फंडिंग पैटर्न की लंबी लड़ाई लड़ चुका है।
मेट्रो प्रोजेक्ट के एमओयू में यह शर्त है कि लेटलतीफी होने पर बढ़ी लागत जीडीए वहन करेगा। डीएमआरसी को फंड की कमी न होने की जिम्मेदारी भी जीडीए पर ही है। ऐसे में अधिकारी भी काम जल्द शुरू होने की उम्मीद बांधें हैं।
दिलशाद गार्डन से नया बस अड्डा मेट्रो ने जितने उतार-चढ़ाव देखे हैं, शायद ही किसी और प्रोजेक्ट में ऐसा हुआ है। वर्षों डीएमआरसी की मंजूरी, फंडिंग पैटर्न के मुद्दे पर अटकी रही मेट्रो का काम शुरू हुआ तो कंस्ट्रक्शन कंपनियों का विवाद आड़े आ गया।
मेट्रो के काम से जुड़े अधिकारियों की मानें तो यदि काम लगातार जारी रहता तो मार्च तक मेट्रो रूट के अधिकतर पिलर दिखने लगते। अब नए सिरे से काम शुरू करने में संसाधन जुटाने और काम को पटरी में लाने में अतिरिक्त समय लगेगा।
मेट्रो से जुड़े सूत्रों की मानें तो 23 दिनों की रोक ने करीब दो माह का काम प्रभावित कर दिया है। ऐसे में शहरवासी यही दुआ कर रहे हैं कि मामले का हल 25 फरवरी को ही निकल आए।
सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट एसके पॉल ने बताया कि जनहित के मद्देनजर विकास से जुड़े प्रोजेक्ट में सुप्रीम कोर्ट का रुख समयबद्ध निस्तारण का है। मेट्रो प्रोजेक्ट से जुड़े मामले का भी निस्तारण जल्द होने की उम्मीद है।