एम्स की ओपीडी में दिखाने के लिए कतार बेशक लंबी है, कई बार जरूरत के हिसाब से अपॉइनमेंट भी नहीं मिलता, लेकिन बड़ी संख्या में मरीज तयशुदा समय में दिखाने नहीं पहुंचते। हर महीने में यह आंकड़ा करीब 15 फीसदी बैठता है। यह अपना अपॉइनमेंट कैंसल भी नहीं कराते। इसकी वजह से आखिरी वक्त तक स्लॉट फुल दिखाता है और किसी जरूरतमंद दूसरे मरीज को इसका लाभ नहीं मिल पाता। गौर करने वाली बात है कि ऐसे लोगों की संख्या हर महीने बढ़ती जा रही है।
दिल्ली एम्स से मिली जानकारी के अनुसार, बीते कुछ समय से लगातार इन लोगों की संख्या बढ़ रही है जो ऑनलाइन वेबसाइट पर जाकर अपॉइनमेंट तो ले लेते हैं लेकिन फिर तय समय पर एम्स नहीं आते हैं और न ही ये लोग समय रहते अपना अपॉइनमेंट निरस्त कराते हैं। इसी साल जनवरी और फरवरी माह की तुलना करें तो एम्स प्रबंधन ने 28926 अपॉइनमेंट की पहचान की है जो बीते दो महीने में तय समय पर ओपीडी में शक्ल दिखाने तक नहीं पहुंचे हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दिल्ली एम्स में अक्सर ओपीडी पंजीयन को लेकर सवाल खड़े होते हैं। लोग लंबी लंबी वेटिंग का हवाला देकर एम्स की स्वास्थ्य सेवाओं को चुनौतीपूर्ण मानते हैं लेकिन इसके पीछे एक कारण लोगों का यह बर्ताव भी है।
उन्होंने बताया कि एम्स में हर दिन 50 फीसदी अपॉइनमेंट ऑनलाइन और बाकी 50 फीसदी ऑफ लाइन किए जाते हैं। सुबह 11 बजे तक ओपीडी में अपॉइनमेंट लिया जा सकता है। इसके बाद विंडो कार्य नहीं करती है। हालांकि इसके बाद भी कुछ जगह या फिर मरीजों के लिए ऑफलाइन अपॉइनमेंट देने की कोशिश की जाती है। इसके अलावा ऑफलाइन अपॉइनमेंट की संख्या इसलिए भी ज्यादा हो जाती है क्योंकि रोगी को ओपीडी के दिन ही अगली तारीख मिल जाती है।
उन्होंने बताया कि बीते जनवरी माह में 91 हजार अपॉइनमेंट हुए और फरवरी माह में 95 हजार से भी ज्यादा अपॉइनमेंट दर्ज किए गए लेकिन इनमें से 28 हजार से ज्यादा लोग अपॉइनमेंट लेने के बाद भी ओपीडी नहीं पहुंचे।
कई महीने लंबी है एम्स में वेटिंग
एम्स की ओपीडी में नए मरीजों के लिए काफी लंबी वेटिंग मिल रही है। कई विभागों में यह वेटिंग एक वर्ष से भी अधिक है। जबकि अधिकांश विभागों की ओपीडी में पांच से छह महीने बाद की तारीख रोगी को मिल रही है। एम्स में ऑनलाइन अपॉइनमेंट कराने के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर सुविधा ली जा सकती है।
वीआईपी रोगियों को मिल रहा है फायदा
एम्स के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि जब ऑनलाइन अपॉइनमेंट लेने के बाद भी रोगी एम्स नहीं पहुंचता है तो उसका समय मुख्य तौर पर उन वीआईपी रोगियों को मिल जाता है जो प्रबंधन की ओर से सीधे तौर पर वहां पहुंचते हैं और ऑफलाइन पंजीयन कराकर ओपीडी ब्लॉक में उपस्थित हो जाते हैं।
नए मरीज में लगता है सबसे ज्यादा समय
डॉक्टरों का कहना है कि ओपीडी में अक्सर सबसे अधिक समय एक नए मरीज को लगता है। आमतौर पर देखें तो चिकित्सीय सलाह के लिए करीब पांच से छह मिनट का औसतन समय प्रति मरीज लगता है लेकिन मरीज पहली बार ओपीडी में आया है तो उसकी जांच से लेकर फाईल बनने तक पूरा दिन लग जाता है और उस दौरान वरिष्ठ डॉक्टर से चिकित्सीय सलाह भी नहीं मिलती है। अगली बार आने पर ही उसे कोई फैकल्टी के कक्ष में जाने की अनुमति होती है।
नहीं आ सकते तो कैंसिल कराएं अपॉइनमेंट
एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि कई बार हम अपॉइनमेंट हासिल कर लेते हैं लेकिन किन्हीं कारणों के चलते उस दिन अस्पताल नहीं पहुंच पाते हैं। ऐसा सामान्य तौर पर हर किसी के साथ हो सकता है। इसके लिए जरूरी है कि अगर किसी के साथ कोई दिक्कत है तो वह अपना अपॉइनमेंट कैंसिल करा दे या फिर अगली डेट का कोई अपॉइनमेंट प्राप्त कर ले। अगर ऐसा वह करता है तो उसी दिन का अपॉइनमेंट किसी ऐसे रोगी को मिल सकता है जिसे उसकी ज्यादा जरूरत है। लेकिन लोग अपॉइनमेंट कैंसिल नहीं कराते हैं जिससे न वह उनके प्रयोग में रहता है और न ही कोई और रोगी उसका इस्तेमाल कर पाता है।
| माह |
ऑनलाइन अपॉइनमेंट |
ऑफलाइन अपॉइनमेंट |
कुल |
नहीं पहुंचे |
| जनवरी |
23767 |
67298 |
91065 |
14527 |
| फरवरी |
23394 |
71933 |
95327 |
14399 |