नाईनंगला गांव कहने को तो निर्मल ग्राम पंचायत का पुरस्कार जीत चुका है। लेकिन यहां आज भी ज्यादातर गलियां अभी कच्ची हैं। सौ प्रतिशत घरों में शौचालय बनाने के दावे भी खोखले नजर आते हैं।
सवेरे महिलाएं और पुरुष खुले में शौच करने जाते हैं। ये गांव मेवात के उन पांच गांवों में शामिल रहा था जिन्हें साल 2011 में निर्मलता के लिए प्रदेश सरकार ने सम्मानित किया था।
जनगणना 2011 के मुताबिक आबादी 1688 और 257 घर हैं। बीते चुनाव में 923 वोटरों ने नयी पंचायत को निर्विरोध चुना। अनुसूचित जाति की आबादी 109 है। दो आंगनवाड़ी केन्द्र के अलावा गांव में घुसते ही मिडिल स्कूल भी है।
गांव का फिरनी वाला रास्ता कच्चा है तो कई रास्ते ऐसे हैं जिनसे लोग कीचड़ के कारण निकलना पंसद नहीं करते। पंचायत विभाग के आलाधिकारी भी नाईनंगला का नाम आते ही खीज खाने लगते हैं।
कोई भी अब जिमेदारी लेने के लिए तैयार नहीं है। पूर्व महिला सरपंच निर्मल गांव के अपने दावों को सही ठहराती हैं तो गामीण दावों को कागजी खेल बताते हैं। पिछले कार्यकाल में करोड़ों रुपये ग्राम विकास के लिए आए और गांव सरकार की डिजीटल साइट पर भी चढ़ गया।
इसी गांव के बीपीएल परिवार के मुखिया जफरूदीन सहित उनके तीन भाईयों को अभी तक शौचालय योजना और आवास का लाभ नहीं मिला है। मेवात की नई जिला परिषद प्रमुख अनीशा बानो का भी ये पैतृक गांव है, वहीं कई एनजीओ भी यहां काम करती हैं।
हाजी अहमद (66) बताते हैं कि साफ सफाई का ढिंढोरा पीटा जा रहा है। असल में सैकड़ों घर शौचालय बनने से वंचित हैं। गलियों में नालियों का कोई प्रबंध नहीं है।
लंबरदार हाजी सद्दीक (82) का कहना है कि बडे़ अफसर कई बार आए और गांव को देखकर गये। लेकिन हुआ कुछ नहीं। पूर्व महिला सरपंच अलीमन बताती हैं कि मुझसे जो बन सका मैंने गांव में कराया। उस दौरान शौचालय और सौंदर्यीकरण के लिए नाईनंगला को निर्मल अवार्ड भी मिला।
महिला सरपंच संगीता ने आरोप लगाया कि पूर्व सरपंच दावा करती हैं कि प्रत्येक घर में शौचालय बनवाया लेकिन आज भी सौ से ज्यादा घरों में शौचालय नहीं है।
बीडीपीओ रतन सिंह ने बताया कि उनके यहां आने से पहले ही नाईनंगला निर्मल ग्राम पंचायत का पुरस्कार पा चुका था।