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उत्तराखंडः युवाओं को रास नहीं आ रहे गांव, 40 प्रतिशत से अधिक युवाओं का हुआ पलायन

Wed, 09 Oct 2019 10:24 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • पलायन आयोग की रिपोर्ट में उभर कर सामने आई हकीकत
  • पंचायतों में 24 हजार से अधिक पदों का रिक्त रहना इस ओर इशारा 
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रदेश में रोजगार की खासी मारामारी के बीच यह भी साबित हो रहा है कि युवाओं को गांवों (पंचायतों) में अपना भविष्य नहीं दिख रहा है। हालात ये हैं कि प्रदेश की अधिकतर ग्राम पंचायतों से 40 प्रतिशत युवा रोजगार और अन्य मामलों को लेकर ग्राम पंचायतों को छोड़ना ही बेहतर मान रहे हैं। राज्य पलायन आयोग की हाल की ही एक रिपोर्ट से यह सामने भी आया है। 

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प्रदेश में 11 अक्टूबर को पंचायत चुनाव के दूसरे चरण के तहत 31 विकासखंड में मतदान होना है। पहले चरण में करीब 70 प्रतिशत मतदान हुआ था। राज्य निर्वाचन आयोग को भी लगा था कि छोटी सरकार को लेकर मतदाताओं में उत्साह है, लेकि न युवाओं को फिलहाल पंचायतों में काम करना भी रास नहीं आ रहा है। पलायन आयोग की सितंबर माह में जारी रिपोर्ट के मुताबिक ग्राम पंचायतों में 25 से 36 आयु वर्ग के लोगों का करीब 42 प्रतिशत पलायन हो रहा है।

करीब 50 प्रतिशत युवा इसमें रोजगार की तलाश में ही पलायन कर रहे हैं। चौंकाने वाली बात ये है कि अधिकतर जिलों में राज्य के औसत से अधिक पलायन पाया गया है। इसमें हरिद्वार से सबसे अधिक पलायन उभर कर सामने आया है। साफ है कि युवा छोटी सरकार के प्रति बहुत अधिक आश्वस्त नहीं है। पंचायत चुनाव में 24 हजार से अधिक पदों का रिक्त रहना भी इस ओर इशारा कर रहा है।विशेषज्ञों का कहना है कि इसका एक सीधा कारण ग्राम पंचायतों के स्तर पर रोजगार के अधिक अवसर का न होना भी है। छोटी सरकार को अभी तक प्रदेश में संविधान में घोषित 29 में से एक भी अधिकार नहीं मिला है। ऐसे में पंचायतों के स्तर पर स्थानीय स्तर पर रोजगार विकसित नहीं हो पा रहा है और न ही युवाओं की कार्यक्षमता के उपयोग की कोई ठोस व्यवस्था बन रही है। 
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पंचायतों को पहला पाठ तो उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का ही पढ़ाना होगा। इसके लिए पंचायतों को अधिकार दिए जाने जरूरी है। पंचायत चुनाव के बाद इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाएगा। युवाओं का पंचायतों में रुचि न लेना भी चिंता का कारण है। ऐसे में पंचायतों की कार्यक्षमता भी प्रभावित होगी।
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- जोत सिंह बिष्ट, संयोजक, पंचायत जनाधिकार मंच

कहां की ग्राम पंचायतों से कितना पलायन (26 से 35 आयु वर्ग में, प्रतिशत में )

उत्तरकाशी            36.56
चमोली               43.49    
रुद्रप्रयाग                41.83
टिहरी                    40.92
देहरादून                    34.47
पौड़ी                        41.67
पिथौरागढ़                    42.58
बागेश्वर                    42.1
अल्मोड़ा                     42.22
चंपावत                     45.49
नैनीताल                    44.47
ऊधमसिंह नगर             43.34
हरिद्वार                        52.79
कुल राज्य का औसत         42.25

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