राज्यसभा सांसद और देहरादून की पूर्व मेयर मनोरमा डोबरियाल शर्मा को सशक्त महिला आंदोलनकारी के रूप में भी याद किया जाएगा। करीब 20 साल पहले 1994 में पृथक उत्तराखंड के लिए आंदोलन के दौरान उनके पेट पर लगी पुलिसिया लाठी उनकी लिए जानलेवा साबित हुई।
लीवर में आई चोट आगे चलकर ट्यूमर बन गया और लीवर प्रत्यारोपण सफल न होने पर उनकी जान चली गई। सरकारी तंत्र की लापरवाही और चिन्हीकरण की जटिल प्रक्रिया से उन्हें जिंदा रहते चिन्हित राज्य आंदोलनकारी का दर्जा नहीं मिल सका।
1994 में राज्य निर्माण आंदोलन से जुड़े लोगों ने राज्य के सभी चुनावों को बहिष्कार किया था। उसी दौरान गन्ना समिति के चुनाव कराए गए। जिसके विरोध में अन्य आंदोलनकारियों के साथ मनोरमा शर्मा भी शामिल हुईं। विरोध तेज होता देख पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया।