यूपी, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल समेत उत्तर भारत के सभी राज्यों के पुलिस विभाग में बगैर लिखित परीक्षा के उप-निरीक्षक (दारोगा) के पद पर पदोन्नति दी जाती है। लेकिन उत्तराखंड में ऐसा नहीं है। यहां मुख्य आरक्षियों को पदोन्नति पाने के लिए लिखित परीक्षा देनी होती है।
बिना परीक्षा प्रमोशन नहीं
उत्तराखंड में सेवानिवृति की दहलीज पर खड़े मुख्य आरक्षियों को दो चार साल के लिए उप-निरीक्षक बनना है तो भी लिखित परीक्षा पास करनी होगी। बिना परीक्षा 200 से ज्यादा इन मुख्य आरक्षियों को पीएचक्यू प्रमोशन देने को राजी नहीं है।
हालांकि मुख्यमंत्री ने इस मामले में गृह विभाग से निर्णय लेने को कहा है। वैसे यह प्रावधान पुलिस में केवल उप-निरीक्षक के पद पर प्रमोशन पाने के लिए ही है।
ऐसे होती है पदोन्नति
सिपाही से मुख्य आरक्षी, उप-निरीक्षक से निरीक्षक, निरीक्षक से डिप्टी एसपी, डिप्टी एसपी से एडिशनल एसपी तक पदोन्नति के लिए वरिष्ठता व श्रेष्ठता ही आधार होती है। पुलिस निरीक्षक पद पर पदोन्नति के लिए तो मात्र डीजीपी की अध्यक्षता में गठित बोर्ड साक्षात्कार की औपचारिकता पूरी कर दारोगाओं का प्रमोशन कर देता है।
प्रमुख सचिव का कहना
इस मामले को लेकर एक बैठक हो चुकी है और जल्द ही दूसरी बैठक बुलाकर निर्णय लिया जाएगा। पीएचक्यू व दूसरे पक्ष के अपने-अपने तर्क है। लेकिन जल्द ही फैसला लेकर आदेश जारी कर दिया जाएगा।
-एमएच खान, प्रमुख सचिव गृह