इस अवसर पर स्थानीय जनता और महाविद्यालय की ओर से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर कण्वाश्रम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित कराने, कण्वाश्रम के विकास के लिए यहां पहुंचने वाली सभी मार्गों की मरम्मत कराए जाने, कण्वाश्रम के पांच किमी. तक मांस और मदिरा के पूर्णतया निषेध किए जाने, पर्यटकों की सुरक्षा के लिए पुलिस चेक पोस्ट स्थापित करने, कण्वाश्रम में बहने वाली मालन नदी की पवित्रता के लिए शमशान घाट का निर्माण किए जाने, कण्वाश्रम के नजदीकी क्षेत्र को पर्यटकों के लिए विकसित किए जाने, कण्वाश्रम के निकटवर्ती ऐतिहासिक स्थानों का उल्लेख भारत के पर्यटन मानचित्र ने दर्शाए जाने और इन स्थानों में बुनियादी सुविधाएं विकसित कर पर्यटकों के पैकेज टूर लाने की व्यवस्था करने, गुरुकुल महाविद्यालय में पेयजल की व्यवस्था करने और महाविद्यालय की दो हेक्टेयर भूमि को 99 वर्ष के लीज पर दिए जाने की मांग की।
इस अवसर पर मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक इंद्रेश कुमार, वन मंत्री डा. हरक सिंह रावत, परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष चिदानंद मुनि, महाविद्यालय के संस्थापक डा. विश्वपाल जयंत, पिरान कलियर से पहुंचे छोटे मियां सावरी, सर्वधर्म धाम हरिद्वार के संस्थापक शरफरुद्दी खान, अफजल मंगलौरी, राजेंद्र प्रसाद अंथवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष शैलेंद्र बिष्ट, मनोज अरोड़ा, अमन चटवाल, तरुण बजाज, योगी विश्वकेतु आदि मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन राजवीर शास्त्री, सुषमा जखमोला और मेजर हिमांशु (सेनि) ने किया।
कण्वाश्रम स्थित गुरुकुल महाविद्यालय में आयोजित मुस्लिम योग शिविर के पहले दिन विभिन्न समुदाय के करीब 200 साधकों ने योग का अभ्यास किया। योगीराज ब्रह्मचारी डा. विश्वपाल जयंत ने मुख्यमंत्री की मौजूदगी में मुस्लिम समुदाय समेत सभी समुदाय के साधकों को योगाभ्यास कराया।
पने संबोधन में इंद्रेश कुमार ने योग शिविर को नए भारत का उदय बताया। कहा कि कुछ मुस्लिम नेता योग के नाम पर लोगों को भ्रमित कर रहे हैं। अब समय आ गया है कि योग के माध्यम से जाति और धर्म के भेदभाव को भूलकर निरोग समाज के लिए कार्य किया जाए। कण्वाश्रम से योग के माध्यम से नए भारत के निर्माण की शुरुआत हो गई है। उन्होंने सभी धर्म के लोगों से निरोग रहने के लिए योग को अपनाने की अपील की।
कण्वाश्रम में पहली बार आयोजित हो रहे मुस्लिम योग शिविर का सभी धर्म के लोगों ने स्वागत किया है। उन्होंने इस पहल को निरोग रहने और आपसी सदभाव के लिए समय की जरूरत बताया। इस अवसर पर लोगों ने अमर उजाला को अपनी प्रतिक्रियाएं दी।
मुस्लिम योग शिविर पहली बार कोटद्वार में कण्वाश्रम की धरती पर हो रहा है। योग की शक्ति को पूरा विश्व मान रहा है। योग किसी धर्म का नहीं है, योग का अर्थ लोगों के आपस में जोड़ना है। मिटने-मिटाने की बात को छोड़कर अब योग के माध्यम से मिलने-मिलाने की बात होनी चाहिए।
- स्वामी चिदानंद मुनि, अध्यक्ष परमार्थ निकेतन ऋषिकेश
जिस प्रकार सूर्य सभी के लिए ऊर्जा देता है, उसी प्रकार योग सभी के लिए है। योग का काम शरीर को निरोग रखना है। लेकिन, कुछ मुस्लिम लोग योग को अपने धर्म के विरुद्ध मानते हैं। इसी भ्रांति को दूर करने के लिए मुस्लिम योग शिविर का आयोजन किया जा रहा है।
- डा. विश्वपाल जयंत, संस्थापक वैदिक गुरुकुल विश्वविद्यालय कण्वाश्रम
शरीर को स्वस्थ रखने का योग सबसे बेहतरीन तरीका है, हमें इंसानियत के लिए योग को अपनाना चाहिए। कुछ कट्टरपंथी लोग योग को लेकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। योग का विरोध करना इंसान का इंसानियत से नफरत करने के समान है।
- छोटे मियां सावरी, खादिम पिरान कलियर
अब समय आ गया है राष्ट्र की एकता अखंडता के लिए आपसी भेदभाव छोड़कर एकजुटता के साथ आगे बढ़ने का। योग के माध्यम से नफरत छोड़ो- भारत जोड़ो का संदेश पूरे देश को देना है। मुस्लिम योग शिविर की यह पहल काबिले तारीफ है।
- शरफरुद्दीन खान, संस्थापक सर्वधर्म धाम हरिद्वार