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विश्व मूक-बधिर दिवस: खामोश हैं तो क्या हुआ, इनकी सफलता मचा रही शोर, तस्वीरें...

Sun, 26 Sep 2021 01:01 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal दीपक प्रजापति, अमर उजाला, हरिद्वार
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divyang - फोटो : अमर उजाला
दिव्यांगता अभिशाप नहीं बल्कि समाज से हटकर कुछ अलग करने का जज्बा पैदा करता है। इसे लेकर जिंदगी को कोसने के बजाय उसके साथ जीने का सलीका सीखना चाहिए। ऊपरवाले ने हर किसी को अलग काबिलियत से नवाजा है। बस जरूरत है उसे निखारने की।

अगर समाज का सही साथ मिले तो मूक-बधिर भी आसमान छू सकते हैं। आज मूक-बधिर दिवस पर बात कुछ ऐसे मूक बधिर दिव्यांगों की जो बिना कुछ कहे या सुने इशारों में समझकर उसे करने का हुनर रखते हैं। साथ ही वह सामान्य लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं। इनकी प्रतिभा पर पहचान का संकट भले ही हो, पर उनके हुनर ऐसे हैं कि उनको जमाने के सामने आना ही है।

रावली महदूद निवासी अतुल राठौर पिछले 10 वर्षों से गुरुग्राम की लेमन ट्री सहित विभिन्न पतंजलि योगपीठ, सिडकुल की विप्रो, डेंसो, सुपर साइन सर्विसेज में कर्मचारी और एआर इंजीनियरिंग में मेंटेन इंचार्ज रह चुके हैं।
 
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अतुल राठौर - फोटो : अमर उजाला
अतुल दो वर्षों से वह एक मार्ट में एसोसिएट सेल्स के पद पर कार्यरत है। मॉर्ट में अपने साथ काम करने वाले स्टाफ को पूरी लगन के साथ काम करने के लिए कहते हैं। समय-समय पर स्टाफ को बताते हैं कि ग्राहक के साथ किस तरह से पेश आना है।
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संदीप अरोड़ा - फोटो : अमर उजाला
न्यू हरिद्वार कॉलोनी निवासी संदीप अरोड़ा हरिद्वार देवभूमि बधिर एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं। वह वर्ष 2012 से मूक-बधिरों के लिए काम कर रहे हैं। उनकी संस्था वर्ष 2015 में रजिस्टर्ड हुई थी। कोरोनाकाल में संदीप अरोड़ा और उनकी पत्नी सोनिया अरोड़ा ने हरसंभव लोगों की मदद की थी। आज संदीप की शादी की सालगिरह भी है। संदीप का उद्देश्य है कि मूक-बधिरों के लिए हरिद्वार में एक स्कूल खोलें। इसके साथ ही इंटरप्रेटर की नियुक्ति भी करना चाहते हैं।

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चेतन सैनी - फोटो : अमर उजाला
रुड़की के मोहल्ला माता वाला बाग पुरानी तहसील निवासी चेतन सैनी सिडकुल की एक कंपनी में सिस्टम मैनेजमेंट में क्वालिटी एस्यूरेंस मैनेजर हैं। चेतन सैनी ने बीसीए तक की पढ़ाई की हुई है जबकि एमसीए तृतीय वर्ष की पढ़ाई जारी है। चेतन जिस कंपनी में तैनात हैं, वहां के कर्मचारी और अधिकारी उनकी इशारों की भाषा पूरी तरह समझते हैं। यदि चेतन साथ करने वाले किसी कर्मचारी को इशारों के माध्यम से कोई काम बताते हैं तो वह उस काम को करता है।
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विवेक केशवानी - फोटो : अमर उजाला
नाथनगर निवासी विवेक केशवानी ने मोदी केयर में तीन साल तक मल्टी लेवल मार्केटिंग का काम किया है। इस समय वह एक अन्य कंपनी में दो साल से काम कर रहे हैं। यहां सामान खरीदने आने वाले ग्राहकों से वह लिखकर पूछते हैं कि क्या चाहिए। इसके बाद ग्राहक को सामान उपलब्ध कराते हैं। विवेक के साथ काम करने वाले उनकी इशारों की भाषा को पूरी तरह से जानते हैं और समझते हैं। विवेक का कहना है कि आदमी को कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए।
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