दिव्यांगता अभिशाप नहीं बल्कि समाज से हटकर कुछ अलग करने का जज्बा पैदा करता है। इसे लेकर जिंदगी को कोसने के बजाय उसके साथ जीने का सलीका सीखना चाहिए। ऊपरवाले ने हर किसी को अलग काबिलियत से नवाजा है। बस जरूरत है उसे निखारने की।
अगर समाज का सही साथ मिले तो मूक-बधिर भी आसमान छू सकते हैं। आज मूक-बधिर दिवस पर बात कुछ ऐसे मूक बधिर दिव्यांगों की जो बिना कुछ कहे या सुने इशारों में समझकर उसे करने का हुनर रखते हैं। साथ ही वह सामान्य लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं। इनकी प्रतिभा पर पहचान का संकट भले ही हो, पर उनके हुनर ऐसे हैं कि उनको जमाने के सामने आना ही है।
रावली महदूद निवासी अतुल राठौर पिछले 10 वर्षों से गुरुग्राम की लेमन ट्री सहित विभिन्न पतंजलि योगपीठ, सिडकुल की विप्रो, डेंसो, सुपर साइन सर्विसेज में कर्मचारी और एआर इंजीनियरिंग में मेंटेन इंचार्ज रह चुके हैं।