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घरवाले खाली हाथ, बाहरवालों पर लुटा रहे अरबों

Fri, 04 Apr 2014 01:44 PM IST
बिशन सिंह बोरा/ अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड सरकार ने सिंचाई विभाग समेत पांच संस्थाओं को विभिन्न निर्माण कार्यों के अधिकार तो दिए, लेकिन लगता है उसे खुद इन संस्थाओं पर भरोसा नहीं।
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घर की संस्थाएं खाली हाथ बैठी
ऐसा न होता तो प्रदेशभर में चल रहे विभिन्न प्रोजेक्टों का जिम्मा इन संस्थाओं के बजाय यूपी राजकीय निर्माण निगम और अन्य बाहरी एजेंसियों को नहीं दिया जाता।

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आलम यह है कि घर की संस्थाएं खाली हाथ बैठी हैं, जबकि सरकार बाहरी एजेंसियों पर अरबों रुपये बहा रही है, वह भी सेंटेज के साथ।

निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल
जानकारी के मुताबिक राज्य गठन के बाद से अब तक प्रदेश में विभिन्न प्रोजेक्ट पर काम कर रहे यूपी राजकीय निर्माण निगम को प्रदेश सरकार चार अरब सेंटेज चार्ज दे चुकी है।
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इसके बावजूद निगम की निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठने के साथ कई काम अधूरे पड़े हुए हैं। सिंचाई विभाग कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश रमोला बताते हैं कि प्रदेश में वर्ष 2005 में बाहरी एजेंसियों को काम देने पर रोक लगी, लेकिन कुछ समय बाद रोक हटा दी।

वर्ष 2007 में फिर रोक लगी, लेकिन फिर रोक हटी। अब कांग्रेस सरकार ने चार नई एजेंसियों को भी प्रदेश में काम दे दिया है। कहा कि चुनाव के दौरान यह मसला जनप्रतिनिधियों के समक्ष उठाया जाएगा।

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इसके अलावा चुनाव के बाद प्रदेशभर में आंदोलन किया जाएगा। बताया कि इस मामले में जनहित याचिका भी दायर की जाएगी।

प्रदेश की अपनी एजेंसियां
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2004 में सिंचाई विभाग, गढ़वाल मंडल विकास निगम, कुमाऊं मंडल विकास निगम, जल निगम और ग्रामीण अभियंत्रण सेवा को निर्माण एजेंसियां घोषित किया।

बाहरी एजेंसियां
उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम, एनबीसीसी (नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन), एनपीसीसी (नेशनल प्रोजेक्ट कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन), ईआईपीएल (इंजीनियरिंग इंडिया प्रोजेक्ट लिमिटेड), बीएनआर (बिल्डिंग एंड रूफ कंस्ट्रक्शन) और बीएसएनएल (भारत संचार निगम लिमिटेड)।

बाहरी एजेंसियों को काम
- गैरसैंण में विधानसभा भवन निर्माण एनबीसीसी
- दून में चार फ्लाईओवर निर्माण का काम ईआईपीएल
- दून और अल्मोड़ा में मेडिकल कालेज यूपी राजकीय निर्माण निगम

सिंचाई विभाग को बनाया पंगु
सिंचाई विभाग ने प्रदेश में करोड़ों की लागत से जलविद्युत परियोजनाओं का निर्माण किया, लेकिन वर्ष 2010 में सिंचाई विभाग से यह काम छीन लिया गया। इसके साथ ही विभाग की कमर टूटनी शुरू हो गई।

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अब विभाग के 28 डिवीजन खाली हैं। विभाग अब केवल सिंचाई नहरों का निर्माण, बाढ़ सुरक्षा और मरम्मत का काम देख रहा है।

दूसरी ओर, जल निगम, गढ़वाल मंडल विकास निगम, कुमाऊं मंडल विकास निगम और ग्रामीण अभियंत्रण सेवा के पास कोई काम ही नहीं है।

यह है सेंटेज चार्ज
पूर्व में प्रदेश की अपनी कोई निर्माण एजेंसी नहीं थी, ऐसे में यूपी निर्माण निगम से करोड़ों रुपए के काम कराए गए। तय किया गया कि एक करोड़ रुपए के काम में प्रदेश सरकार निगम को 12.5 प्रतिशत यानी 12.5 लाख रुपये अतिरिक्त देगी।
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यही राशि सेंटेज चार्ज है। खंडूड़ी सरकार ने इसे घटाकर 8.5 प्रतिशत किया। दूसरी ओर, प्रदेश की अपनी एजेंसी से काम कराने पर सेंटेज चार्ज नहीं दिया जाता।

वर्तमान में जितने भी बड़े प्रोजेक्ट हैं सभी बाहर की एजेंसियों के पास हैं, जबकि प्रदेश की एजेंसियां खाली हाथ हैं। यह भ्रष्टाचार है और इस मसले पर जनहित याचिका दायर की जाएगी।
- नवीन कांडपाल, पूर्व अध्यक्ष, डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ
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