उत्तराखंड के चंपावत जिले में मरीजों को भले ही दवा न मिल सके, मगर सरकार दारू का भरपूर इंतजाम कर रही है।
सचल चिकित्सा वाहन 40 महीने से ‘बीमार’ है। इस अवधि में इस वाहन में किसी मरीज का इलाज नहीं किया गया।
स्वास्थ्य विभाग को इसे दुरुस्त करने की चिंता नहीं है। वहीं सरकार ने वाहन से शराब पहुंचाने की व्यवस्था कर रखी है।
अस्पताल परिसर में खड़ी वैन पर लग चुका है जंक
साढ़े 31 लाख रुपए की लागत से बने चलित शल्य चिकित्सालय एवं परीक्षण वाहन (मोबाइल वैन) ने 40 माह से सेवा नहीं दी है।
अस्पताल परिसर में खड़ी इस वैन पर जंक लग चुका है। सीएमओ हरीश चंद्रा का कहना है कि धन नहीं मिलने से वैन का संचालन ठप है।
वैन से सालाना 72 कैंप लगाए जाने थे, लेकिन एक वर्ष में 72 तो दूर 2006 से शुरू इस मोबाइल अस्पताल से सिर्फ 39 कैंप लग सके।
पूरी की जा रही शराब की फरमाइश
वहीं, विरोध के चलते पुलहिंडोला में जब शराब की दुकान तो नहीं खुल सकी। तब विभाग ने इसके लिए नायाब रास्ता निकाल लिया गया।
दुकान का विरोध होने पर मोबाइल वैन (चलती-फिरती दुकान) से शराब की फरमाइश पूरी की जा रही है।
जिला आबकारी अधिकारी कैलाश चंद्र बिंजौला का कहना है कि राजस्व के नुकसान से बचने के लिए मोबाइल वैन के जरिए पिछले साल के अप्रैल से शराब की बिक्री कराई जा रही है।
इससे 80.65 लाख रुपए की सलाना कमाई हो रही है।