कुदरत भी कभी-कभी बेहद क्रूर हो जाती है। चार साल की एक बच्ची के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है।
जब बच्ची पैदा हुई तो पता चला कि उसके प्राकृतिक क्रिया करने से लेकर जन्म देने की क्षमता वाले अंग ही नहीं थे। इसके अलावा केवल एक किडनी थी।
मां-बाप ने अपनी क्षमता से हर कोशिश की, लेकिन निराशा ही मिली। कुदरत के लिखे को बदलने की कोशिश सुशीला तिवारी अस्पताल के डॉक्टरों ने की।
यह सर्जरी है बेहद रेयर
सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने प्लास्टिक सर्जरी से उसके तीन अंगों को बनाया है।
डॉक्टरों का दावा है कि यह सर्जरी बेहद रेयर है, जो देश में केवल चुनिंदा जगहों पर ही होती है। चिकित्सकों के अनुसार खटीमा निवासी मां-बाप एक साल पहले तीन साल की बच्ची को लेकर अस्पताल पहुंचे।
प्लास्टिक सर्जरी के जरिए अंगों को बनाया
जांच में पता चला कि बच्ची में मल, मूत्र के अलावा जननांग ही नहीं बने थे। प्राकृतिक दैनिक नित्य क्रिया मल द्वार जैसे छिद्र से हो रही थी।
सर्जरी विभाग के प्रो. केएस शाही कहते हैं कि यह विकृति क्लोएका कहलाती है। हमने बच्ची के आगे के जीवन को देखते हुए रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी का फैसला किया, जिसमें अंगों को प्लास्टिक सर्जरी के जरिए बनाना था।
गुर्दे को हो सकता था खतरा
लेकिन इस सर्जरी से बच्ची के गुर्दे को खतरा हो सकता था, लेकिन हमने चुनौती स्वीकार की।
अलग-अलग अवधि में तीन चरणों में अंगों को बनाया गया। अब उसके अंग बनने के साथ शरीर के अनुरूप कार्य करने भी लगे हैं।
बच्ची लगातार इंप्रूव कर रही है। यह बड़ी उपलब्धि है, इसका पेपर पीडियाट्रिक्स सर्जरी इंटरनेशनल में प्रकाशित होने जा रहा है।