अजय टम्टा को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिली है।
- फोटो : अमरउजाला
केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार में उत्तराखंड से अजय टम्टा को राज्यमंत्री बनाकर भाजपा ने एक तीर से दो निशाने साधे हैं। इस बहाने प्रदेश में दलित व युवा कार्ड खेला है तो पार्टी की रणनीति आगामी विधानसभा चुनावों में दलित मतदाताओं को भाजपा की ओर आकर्षित करने की है।
अभी तक इन्हें परंपरागत रूप से बसपा और कांग्रेस का वोटर माना जाता रहा है। टम्टा के बहाने कुमाऊं मंडल में पार्टी को मजबूती देने की भी कोशिश की गई है।
बता दें कि मुख्यमंत्री हरीश रावत कुमाऊं मंडल से ताल्लुक रखते हैं और वैसे भी वहां कांग्रेस की स्थिति मजबूत मानी जाती है। फिर 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान उत्तराखंड की पांचों सीटें भाजपा के खाते में गई थीं और तभी से मोदी सरकार में उत्तराखंड को प्रतिनिधित्व मिलने का इंतजार था। इसको लेकर कांग्रेस भी भाजपा पर निशाना साधती रही है कि पांच-पांच सांसद होने के बावजूद केंद्र में यहां से कोई मंत्री नहीं है।
प्रदेश के दिग्गजों को किनारे कर टम्टा को मिली जगह
ajay tamta
- फोटो : अमरउजाला
मौजूदा सांसदों बीसी खंडूड़ी, भगत सिंह कोश्यारी, रमेश पोखरियाल निशंक, राज्यलक्ष्मी शाह और अजय टम्टा में से बीसी खंडूड़ी अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री रह चुके हैं। खंडूड़ी इस बार भी मंत्री पद के प्रबल दावेदार थे, लेकिन बढ़ती उम्र और खराब सेहत के चलते उनको कोई जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई।
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल का जब पहली बार विस्तार हुआ था, तब भी अजय टम्टा का नाम उछला था, लेकिन ऐन वक्त पर नाम कट गया था।
इस बार हुए मंत्रिमंडल विस्तार में भी उत्तराखंड से भगत सिंह कोश्यारी और अजय टम्टा का नाम चर्चा में था और कयास लगाए जा रहे थे कि कोश्यारी को कैबिनेट और टम्टा को राज्यमंत्री बनाया जा सकता है। लेकिन ऐन मौके पर सिर्फ टम्टा का नाम ही सूची में शामिल हो सका।
राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की चाल का दिया जवाब
कांग्रेस ने प्रदीप टम्टा को राज्यसभा उम्मीदवार बना दलित कार्ड चला था।
- फोटो : अमरउजाला
भाजपा के रणनीतिकारों का कहना है कि सोची समझी रणनीति के तहत टम्टा को केंद्र में राज्यमंत्री बनाया गया है। टम्टा को मंत्री बनाकर भाजपा ने कांग्रेस के दलित कार्ड की काट चली है, जो उसने राज्यसभा चुनाव में खेला था। वहीं दलित मतदाताओं को भाजपा की ओर आकर्षित करने की भी यह कोशिश है।
इसके पीछे पार्टी की यह भी रणनीति रही है कि तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों में से किसी एक को अगर केंद्र में मंत्री बनाया जाता है तो दो अन्य नाराज हो सकते हैं। अब पार्टी के इन वरिष्ठ नेताओं को आने वाले दिनों में दूसरी अहम जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
केंद्रीय संगठन में भी मिल सकता है मौका
केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद भाजपा के केंद्रीय संगठन में बदलाव की प्रबल संभावना है। उम्मीद है कि इसमें उत्तराखंड को अहम जगह मिल सकती है। आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर किसी वरिष्ठ नेता को केंद्रीय संगठन में जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। अभी केंद्रीय संगठन में उत्तराखंड से कोई पदाधिकारी नहीं है। पूर्व में भगत सिंह कोश्यारी व डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
Published By: Vivek Singh