13 राज्यों में गंभीर जलसंकट
नीति आयोग ने भी अपनी रिपोर्ट में आने वाले समय में जलसंकट की आशंका जताई है। रिपोर्ट के अनुसार देश के कई इलाकों में 2030 तक पीने का पानी खत्म होने की कगार पर पहुंच जाएगा। देश की 40 फ़ीसदी आबादी तक पीने के पानी से महरूम हो जाएगी। उत्तराखंड के अलावा राजस्थान, गोवा, केरल, ओडिसा, बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, सिक्किम, असम, नगालैंड और मेघालय राज्य ऐसे हैं जलसंकट ज्यादा बड़ा है। भूमिगत जल का अत्यधिक दोहन होने के चलते इन राज्यों में भूमिगत जल में भी तेजी से कमी हो रही है।
महाराष्ट्र-कर्नाटक जैसे राज्यों के जलाशयों में बचा बेहद कम पानी
देश के जलविज्ञानियों द्वारा किए गए शोध में यह बात सामने आई है कि जहां उत्तराखंड समेत कई हिमालयी राज्यों में प्राकृतिक जल स्रोत तेजी से सूख रहे हैं, वहीं महाराष्ट्र के चार बड़े जलाशयों में सिर्फ दो फीसदी ही पानी बचा है। कमोबेश यही स्थिति कर्नाटक की भी है जहां चार बड़े जलाशयों में सिर्फ एक फीसदी पानी बचा है।
देश में जरूरत से 70 फ़ीसदी ज्यादा भूमिगत जलदोहन
शोध में यह बात भी सामने आई है कि देश के तमाम राज्यों में भूमिगत जलदोहन बड़ी तेजी से हो रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में जरूरत से 70 फ़ीसदी अधिक भूमिगत जलदोहन हो रहा है। दुनिया के लिहाज से देखें तो 24 फ़ीसदी भूमिगत जल का दोहन अकेले भारत में हो रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक जल गुणवत्ता सूचकांक में भी भारत की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। जल गुणवत्ता सूचकांक में 122 देशों में भारत 120वें पायदान पर है।