नासा के सेटेलाइट चित्रों से जैसलमेर में प्राचीन जल के चैनल होने की जो बात उभरकर सामने आई थी। उसका अहसास किसी न किसी रूप में 1940 में जैसलमेर रियासत के दीवान और बाद में पटियाला हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने नंद किशोर गोदानी को हो गया था।
रुड़की स्थित अपने पुत्र से साझा की गई बात पर यकीन किया जाए तो महल के कुएं के नीचे सरस्वती के जल का स्रोत है।
केएलडीएवी पीजी कॉलेज रुड़की के पूर्व प्राचार्य एवं शिक्षाविद् डॉ. वीके महेश्वरी के पिता जैसलमेर रियासत में दीवान थे।
रियासत में पानी के लिए बनी बावड़ी (तालाब) ही लोगों की जलापूर्ति का एकमात्र साधन था। जबकि राजा और रानी महल स्थित एक कुएं के पानी का इस्तेमाल करते थे।