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देश के नए राष्ट्रपति का नाम ‘हरीश रावत’, क्या है मामला?

Fri, 08 May 2015 03:11 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, रुड़की
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देश के राष्ट्रपति का नाम हरीश रावत और प्रधानमंत्री का नाम डॉ. मनमोहन सिंह है। यह सुनने जरूरी अजीब लग रहा होगा। लेकिन सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे अधिकांश बच्चों को देश के नेताओं के बारे में कुछ इसी तरह की जानकारियां हैं। बच्चों के इस सामान्य ज्ञान से सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि बच्चों को स्कूलों में क्या पढ़ाया जा रहा है।
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हालांकि कुछ बच्चे ऐसे भी हैं जिन्होंने सही जवाब दिए लेकिन इनकी संख्या बेहद कम हैं। अमर उजाला की टीम ने गुरुवार को भी शहर के कुछ स्कूलों में जाकर वहां की स्थिति देखी।

‘गांव के मुख्यमंत्री फुरकान और शहर के प्रदीप बत्रा’
पुरानी तहसील पड़ाव स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय (बालक) में जब अमर उजाला की टीम पहुंची तो उस विद्यालय में 18 बच्चे थे। जबकि विद्यालय में 35 बच्चे पंजीकृत हैं। विद्यालय में तीन शिक्षिकाओं में से दो शिक्षिका उमा शर्मा एवं तरु गोयल उपस्थित थी।
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कक्षा आठ के बच्चों से जब पूछा गया कि हमारे देश के राष्ट्रपति का नाम क्या है तो एक बच्चे ने बताया कि राष्ट्रपति का नाम हरीश रावत है। इसी तरह से एक अन्य बच्चे ने बताया कि प्रदेश में दो मुख्यमंत्री हैं गांव के मुख्यमंत्री फुरकान और शहर के मुख्यमंत्री प्रदीप बत्रा है।

एक बच्चे ने प्रधानमंत्री का नाम डॉ. मनमोहन सिंह बताया। जबकि एक बच्चे ने प्रदेश का नाम देहरादून बताया। हालांकि कुछ बच्चों ने राष्ट्रगान क्या है बता दिया। 35 बच्चों पर तीन शिक्षिकाएं होने के बाद भी बच्चों को प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री आदि के बारे में सही जानकारी नहीं है।
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101 छात्रों को पढ़ाती है एक शिक्षिका

राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय पड़ाव के ही परिसर में राजकीय प्राथमिक विद्यालय नंबर-2 स्थित है। विभाग की अनदेखी का आलम यह है कि राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय जिसमें महज 35 छात्र हैं, उनमें भी आधे ही छात्र आते हैं। उन्हें पढ़ाने के लिए तीन शिक्षिकाएं हैं।

जबकि विद्यालय नंबर-2 में 101 छात्रों पर केवल एक शिक्षिका रजनीश वशिष्ट तैनात हैं। अमर उजाला की टीम जब इस विद्यालय में पहुंची तो एक कमरे में शिक्षिका रजनीश वशिष्ट पढ़ा रही थी। कक्षा में 39 छात्र उपस्थित थे। हालांकि इस स्कूल में बच्चों का सामान्य ज्ञान काफी ठीकठाक था।

कक्षा पांच की छात्रा फरहानाज से जब पूछा गया कि देश के राष्ट्रपति का नाम क्या है तो उसने झट से प्रणव मुखर्जी बता दिया। अन्य छात्रों ने भी प्रश्नों के उत्तर लगभग ठीक ही दिये। शिक्षिका रजनीश वशिष्ट ने बताया कि विद्यालय में कोई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नहीं है। जिसके कारण बच्चों को संभालने में काफी परेशानी होती है।  

कविता सुनाने को बच्चों में दिखी होड़
सरकारी स्कूलों में व्यवस्थाओं का कैसा हाल है। यह किसी से छिपा नहीं है। इन सब के बाद भी बच्चे अन्य स्कूलों के बच्चों से कम नजर नहीं आते हैं। अमर उजाला की टीम जब अंबर तालाब स्थित विद्यालय नंबर-12 में पहुंची तो उस समय क्लास चल रही थी।

वैसे स्कूल में 51 बच्चे पंजीकृत हैं। लेकिन उपस्थित केवल 18 थे। इस स्कूल की खास बात यह रही कि यहां पर जिस भी बच्चे से जो भी प्रश्न किया, उसने उसका उत्तर दिया।

अलीना, शिवांग, शिवम, सुमित, कर्त्तव्य और विकास आदि ने बेबाक उत्तर दिये। यही नहीं इन बच्चों ने कविताएं भी सुनाई। एप्पल आदि की स्पेलिंग भी सुनाई। शिक्षिका पूनम अरोड़ा ने बताया कि विद्यालय में वह अकेली तैनात है। भोजनमाता पढ़ाने में उसकी मदद करती है।
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