आपदा ने केदार बाबा के धाम की दूरी तीन किमी बढ़ा दी है। पिछले साल तबाही से पूर्व धाम तक गौरीकुंड से 14 किलोमीटर चलना पड़ता था।
अब यह दूरी 17 किमी हो गई है। अब पैदल यात्रा गौरीकुंड बाजार से एक किमी पहले से शुरू होती है।
वहीं रामबाड़ा से ऊपर केदारनाथ धाम तक पूरा नया मार्ग है जिसे मजबूत करने का काम जारी है।
मंदाकिनी नदी में बह गया गौरीकुंड बाजार
16/17 जून को आई आपदा से पूर्व गौरीकुंड बाजार आबाद था। यहां बस स्टेशन पर जगह कम होने के कारण वाहन चालक यात्री उतार कर वाहन पार्किंग में खड़ी कर देते थे।
लेकिन अब न तो पार्किंग है और न ही बस स्टेशन। गौरीकुंड का आधा बाजार मंदाकिनी नदी की बाढ़ में बह गया।
केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग के ध्वस्त होने के कारण वाहन बड़ी पार्किंग तक पहुंच पा रहे हैं। यहां से करीब 400 मीटर खड़ी चढ़ाई वाला रास्ता चढ़कर मुंडकटिया-गौरीकुंड पैदल मार्ग पर जाना होता है।
चल रहा है मार्ग का सुधारीकरण कार्य
जहां पहले बाजार के बीचों बीच संकरे मार्ग पर प्रतिदिन हजारों यात्री गुजरते थे। अब बाजार के ऊपर से यात्री सीधे घोड़ा पड़ाव पहुंचता है।
घोड़ा पड़ाव का भी नामोनिशान मिट चुका है। यदि किसी यात्री को घोड़ा लेना होता है, तो सोनप्रयाग में प्रीपेड बुकिंग होती है।
लोनिवि द्वारा घोड़ा पड़ाव में पैदल मार्ग का निर्माण कर दिया गया है। इससे आगे छौड़ी में भी पहाड़ी काटकर और पुश्ता डालकर मार्ग को दुरुस्त कर दिया गया है।
रामबाड़ा में अभी लोनिवि मार्ग का सुधारीकरण कार्य कर रहा है। यहां से मार्ग मंदाकिनी नदी के पार दांयी ओर से गुजर रहा है।
वीरान हो गया है रामबाड़ा
जलप्रलय में रामबाड़ा, घिनुरपाणी और देवदर्शनी में मार्ग नेस्तानाबूद हो गया था। इसलिए दूसरी नया मार्ग बनाना पड़ा। जिससे रामबाड़ा से केदारनाथ की दूरी दो किमी बढ़ गई।
इस पैच पर रेन शेल्टर और बैठने के लिए बैंच की बहुत कमी खलती है।
कुछ दिन पूर्व तक रामबाड़ा में मार्ग निर्माण कर रहे निम (नेहरू पर्वतारोहण संस्थान) उत्तरकाशी और लोनिवि के कर्मचारी और मजदूर रहा करते थे। अब यह स्थान वीरान हो गया है।
रामबाड़ा से केदारनाथ पुल तक निम को पैदल मार्ग बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। निम ने चार मीटर तक चौड़े रास्ते का निर्माण कर लिया है।
लिनचोली और केदारनाथ में निशुल्क ठहरने की व्यवस्था
कुछ स्थानों पर सीमेंट और कंक्रीट बिछाने का काम चल रहा है। यात्रियों की सुविधा के लिए जगह-जगह पर निम शेल्टर बना रहा है। जिसके नीचे अल्प विश्राम के लिए बेंच लगाए गए हैं।
इस मार्ग पर छोटी लिनचोली, बड़ी लिनचोली और छानी कैंप पड़ाव बन चुके हैं। बड़ी लिनचोली रामबाड़ा की तरह विकसित हो रहा है। यहां टेंट और प्री फेब्रिकेटेड हट्स बनाए गए हैं।
प्रदेश सरकार द्वारा पैदल मार्ग पर जंगलचट्टी, भीमबली, बड़ी लिनचोली और केदारनाथ में निशुल्क भोजन की व्यवस्था की गई है। जबकि बड़ी लिनचोली और केदारनाथ में निशुल्क ठहरने की व्यवस्था है।